उत्तर प्रदेशलखनऊ

4 साल का इंतजार खत्म! UP को मिला परमानेंट DGP, राजीव कृष्णा संभालेंगे कमान

चार साल के लंबे इंतजार के बाद उत्तर प्रदेश को स्थायी डीजीपी मिल गया। 1991 बैच के आईपीएस राजीव कृष्णा को जिम्मेदारी सौंपी गई। वे 2029 तक यूपी पुलिस की कमान संभालेंगे।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Rajiv Krishna || UP Police DGP || Uttar Pradesh Police Chief || Yogi Adityanath DGP Selection|| UP News: उत्तर प्रदेश पुलिस को करीब चार सालो के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अपना स्थायी पुलिस प्रमुख मिल गया है। राज्य सरकार ने 1991 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्णा को उत्तर प्रदेश का नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है। अब तक कार्यवाहक डीजीपी की जिम्मेदारी संभाल रहे राजीव कृष्णा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के बाद प्रदेश की सबसे बड़ी पुलिस जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कार्यकारी DGP से स्थायी तक

राजीव कृष्णा पिछले लगभग एक वर्ष से कार्यकारी डीजीपी के रूप में काम कर रहे थे। जून 2025 में उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी और तब से वे प्रदेश की कानून-व्यवस्था की कमान संभाल रहे थे। उनकी नियुक्ति संबंधी आदेश अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद द्वारा जारी किया गया है। विशेष बात यह है कि डीजीपी पद के साथ-साथ वे सतर्कता अधिष्ठान के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभालते रहेंगे।

चार साल बाद खत्म हुआ कार्यवाहक डीजीपी का दौर

उत्तर प्रदेश में मई 2022 में तत्कालीन डीजीपी मुकुल गोयल को पद से हटाए जाने के बाद से स्थायी डीजीपी की नियुक्ति नहीं हो सकी थी। इस दौरान पुलिस विभाग की कमान कार्यवाहक अधिकारियों के हाथों में रही। पहले डीएस चौहान, फिर राजकुमार विश्वकर्मा, उसके बाद विजय कुमार और प्रशांत कुमार ने कार्यवाहक डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी निभाई। यहां तक कि 2024 का लोकसभा चुनाव भी कार्यवाहक डीजीपी के नेतृत्व में ही संपन्न कराया गया। 31 मई 2025 को प्रशांत कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद सरकार ने राजीव कृष्णा को कार्यवाहक डीजीपी बनाया था। अब उन्हें पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त कर इस लंबे अंतराल को समाप्त कर दिया गया है।

यूपीएससी पैनल में थे तीन बड़े नाम

स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के नियमों के तहत प्रक्रिया पूरी की थी। शासन ने तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल आयोग को भेजा था। इनमें 1990 बैच की रेणुका मिश्रा, 1990 बैच के पियूष आनंद और 1991 बैच के राजीव कृष्णा शामिल थे।

आयोग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य सरकार ने सभी नामों पर विस्तार से विचार किया। अंततः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजीव कृष्णा के नाम पर अंतिम मुहर लगाई। माना जा रहा है कि उनके प्रशासनिक अनुभव, कार्यशैली और सरकार के विश्वास ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

2029 तक संभालेंगे UP पुलिस की कमान

राजीव कृष्णा की सेवानिवृत्ति जून 2029 में प्रस्तावित है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव समेत कई महत्वपूर्ण सुरक्षा और कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर रहेगी। उनके लंबे कार्यकाल को देखते हुए सरकार को पुलिस नेतृत्व में स्थिरता मिलने की उम्मीद है।

इंजीनियर से बने प्रदेश के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी

गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के मूल निवासी राजीव कृष्णा का जन्म 26 जून 1969 को हुआ था। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में उच्च शिक्षा प्राप्त की और इसके बाद भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए।

15 सितंबर 1991 को आईपीएस सेवा में शामिल होने वाले राजीव कृष्णा ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 1995 में उन्हें सीनियर स्केल मिला। 2005 में वे चयन ग्रेड में पहुंचे, 2007 में पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) बने और 2010 में पुलिस महानिरीक्षक (IG) पद पर पदोन्नत हुए।

जनवरी 2016 में उन्हें अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) बनाया गया। इसके बाद फरवरी 2024 में वे पुलिस महानिदेशक (DGP रैंक) तक पहुंचे। अब नियमित डीजीपी नियुक्त होने के साथ ही वे उत्तर प्रदेश पुलिस के सर्वोच्च पद पर औपचारिक रूप से स्थापित हो गए हैं।

कानून-व्यवस्था के लिए अहम फैसला

उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में डीजीपी का पद केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की पूरी रणनीति का केंद्र माना जाता है। ऐसे में राजीव कृष्णा की नियुक्ति को सरकार के एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसले के रूप में देखा जा रहा है।

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