Heavy Rain: उत्तर प्रदेश में मानसून के आखिरी दौर की बारिश ने महज 48 घंटे में भारी तबाही मचा दी। 25 सितंबर की सुबह से 27 सितंबर की सुबह के बीच राज्य में 97.6 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत महज 4.5 मिमी है। भारी बारिश और तूफान से जुड़ी घटनाओं में 56 लोगों की मौत और 46 लोगों के घायल होने की सूचना है। 1,020 से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त हुए और 107 मवेशियों की जान गई। राज्य के 75 में से 56 जिले अति-वृष्टि से प्रभावित बताए गए हैं। कई जिलों में बारिश ने तोड़े रिकॉर्ड बारिश की तीव्रता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि फर्रुखाबाद में सामान्य से 7,385 फीसदी, कन्नौज में 5,664 फीसदी, शाहजहांपुर में 4,408 फीसदी, हमीरपुर में 4,240 फीसदी और महोबा में 4,100 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, 48 घंटे बाद स्थिति में कुछ सुधार हुआ है और भारी बारिश का असर मुख्य रूप से तराई क्षेत्र तक सीमित रहने की संभावना है। आखिर क्यों बरसा इतना पानी? इस असामान्य बारिश के पीछे एक साथ सक्रिय मौसम प्रणालियों को अहम कारण माना जा रहा है। बंगाल की खाड़ी से आया गहरा दबाव क्षेत्र नमी लेकर मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ा। इसी दौरान पश्चिमी विक्षोभ की मौजूदगी ने मौसम को और सक्रिय किया। नतीजा यह रहा कि कुछ इलाकों में कम समय के भीतर बेहद तेज बारिश हुई। लगातार कई घंटों की बारिश से कमजोर मकान, पुरानी संरचनाएं और दीवारें ढह गईं। तेज हवाओं और आकाशीय बिजली ने भी मुश्किल बढ़ाई। कई जगह पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ओडिशा में बाढ़ का खतरा उत्तर और मध्य भारत में बारिश के साथ ओडिशा में भी नदियों का जलस्तर चिंता बढ़ा रहा है। अधिकारियों के अनुसार महानदी प्रणाली में मुंडली के रास्ते पानी का प्रवाह सोमवार सुबह तक 8 लाख क्यूसेक तक पहुंच सकता है। इससे खुर्दा, कटक, पुरी और जगतसिंहपुर के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। उत्तरी ओडिशा में बैतरणी, सालंदी और सुवर्णरेखा समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इससे गांवों में जलभराव और सड़क संपर्क प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। ऋषिकेश में राफ्टिंग पर रोक उत्तराखंड में लगातार बारिश के कारण गंगा का जलस्तर बढ़ने पर ऋषिकेश के मुनि-की-रेती क्षेत्र में रिवर राफ्टिंग को अगले आदेश तक रोक दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक मौसम में सुधार और नदी का जलस्तर सुरक्षित स्तर पर आने के बाद ही गतिविधियां दोबारा शुरू की जाएंगी। इस तरह मानसून की विदाई से पहले हुई तेज बारिश ने यूपी में जान-माल को बड़ा नुकसान पहुंचाया है, वहीं ओडिशा और उत्तराखंड में भी प्रशासन को सतर्क रहना पड़ रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि आने वाले दिनों में मौसम कितनी जल्दी सामान्य होता है। ये भी पढ़ें: UP में बारिश का कहर! स्कूल बंद, सड़कें जलमग्न! कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट