आज मंगलवार, 23 जून 2026 को भारतीय शेयर बाज़ार ने सतर्क लेकिन संतुलित शुरुआत की। बाज़ार खुलते ही Sensex 181 अंक यानी 0.24% की गिरावट के साथ 76,912 पर आ गया, जबकि Nifty 50 भी 47 अंक फिसलकर 24,055 पर खुला। हालांकि यह गिरावट अल्पकालिक रही और बाज़ार में धीरे-धीरे सुधार देखा गया। ग्लोबल संकेत: उम्मीद और अनिश्चितता का मेल आज के बाज़ार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाओं पर निर्भर रही। अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में चल रही शांति वार्ता में प्रगति के संकेत मिलने से निवेशकों में उत्साह बना रहा। इससे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई, जो भारतीय बाज़ार के लिए एक सकारात्मक संकेत रहा। जब तेल सस्ता होता है, तो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था को राहत मिलती है। यूरोपीय बाज़ारों ने भी मिश्रित-से-सकारात्मक प्रदर्शन किया, जिसमें FTSE 100 और STOXX 50 में बढ़त देखी गई। इससे भारतीय निवेशकों का मनोबल कुछ हद तक ऊंचा रहा। सेक्टर प्रदर्शन: IT पर दबाव, Pharma ने संभाला आज का कारोबार "दो रफ्तार वाले बाज़ार" जैसा रहा। IT सेक्टर पर दबाव रहा, जिसके चलते बाज़ार की शुरुआत कमज़ोर रही। लेकिन Healthcare और Consumption सेक्टर की कंपनियों ने बाज़ार को सहारा दिया — Dr. Reddy's Labs, Apollo Hospitals, Cipla, Adani Ports और Tata Consumer जैसे शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। Banking सेक्टर भी मज़बूत बना रहा। Bank Nifty ने एक सकारात्मक तकनीकी संरचना दिखाई, जिसमें 20-दिन और 50-दिन के EMA का बुलिश क्रॉसओवर बना। आगे Bank Nifty के 58,300 और 59,250 के स्तर को छूने की संभावना जताई जा रही है। FII vs DII: घरेलू निवेशकों की बाज़ी 22 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने ₹635 करोड़ की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹1,035 करोड़ की खरीदारी कर बाज़ार को स्थिरता दी। यह दर्शाता है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा भारतीय बाज़ार में बना हुआ है। मानसून की चिंता बरकरार दक्षिण-पश्चिम मानसून की धीमी प्रगति बाज़ार के लिए एक बड़ी चिंता बनी हुई है। अगर मानसून में देरी लंबी हुई, तो इससे महंगाई बढ़ सकती है और कृषि से जुड़े सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। तकनीकी नज़रिया Nifty के लिए तत्काल सपोर्ट 23,900–23,800 की रेंज में है, जबकि मज़बूत सपोर्ट 23,500–23,600 के बीच देखा जा रहा है। ऊपर की तरफ 24,600 का स्तर प्रमुख रेज़िस्टेंस है। निष्कर्ष कुल मिलाकर आज का बाज़ार सतर्क, लेकिन सकारात्मक झुकाव लिए रहा। अमेरिका-ईरान वार्ता, सस्ता कच्चा तेल और मज़बूत घरेलू खरीदारी बाज़ार के लिए अनुकूल रहे। निवेशकों को सलाह है कि गिरावट पर घबराने की बजाय गुणवत्ता वाले शेयरों में धीरे-धीरे निवेश की रणनीति अपनाएं। डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।