Kondli Nala: नोएडा में कोंडली नाले की सफाई और उसमें गिरने वाले नालों को रोकने की योजना अब तक पूरी नहीं हो सकी है। करीब आठ साल बीत जाने के बाद भी प्राधिकरण की योजना जमीन पर नहीं उतर पाई। इस दौरान कोंडली नाले में गिरने वाले 30 नालों को बंद नहीं किया जा सका, जबकि इस मामले में प्राधिकरण पर 100 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लग चुका है। सुप्रीम कोर्ट में डीपीआर पेश अब जल विभाग का कहना है कि नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) के अध्ययन के आधार पर तैयार डीपीआर सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई है। विभाग के मुताबिक दिसंबर 2027 तक छह नालों पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। वहीं दिसंबर 2028 तक सभी 30 नालों का पानी कोंडली नाले में जाने से रोकने का लक्ष्य रखा गया है। सूखे नालों पर दावा रिपोर्ट के अनुसार, जिन छह नालों को बंद करने का दावा किया गया है, वे पहले से ही सूखे थे। इन नालों से कोंडली नाले में पानी नहीं गिर रहा था। ऐसे में विभाग के दावे पर सवाल उठ रहे हैं। चार साल से नहीं हुई नाले की सफाई कोंडली नाले की कुल लंबाई 17.1 किलोमीटर है। इसमें से 4.1 किलोमीटर हिस्से की सफाई की जिम्मेदारी नोएडा प्राधिकरण के जन स्वास्थ्य विभाग की है। लेकिन बताया गया है कि पिछले चार वर्षों से इस हिस्से की सफाई नहीं कराई गई है। फंड जारी होने पर भी उठ रहे सवाल नाले के बाकी करीब 13 किलोमीटर हिस्से की सफाई के लिए जन स्वास्थ्य विभाग को हर साल उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को पांच करोड़ रुपये देने होते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले चार वर्षों से यह फंड जारी नहीं हुआ। हालांकि विभागीय अधिकारी दावा कर रहे हैं कि राशि हर साल दी जा रही है। अब इस पूरे मामले में फंड के उपयोग और भुगतान की स्थिति जांच के बाद ही साफ हो सकेगी। ये भी पढ़े : अवैध कोचिंग और लाइब्रेरी पर प्रशासन बेखबर, सही आंकड़ा तक नहीं