GIMS Strike : ग्रेटर नोएडा के जिम्स में आउटसोर्स कर्मचारियों की हड़ताल 10वें दिन भी जारी रही। 24 जून की रात हुई घटना के बाद गिरफ्तार हुए सहयोगियों की आज़ादी की मांग पर कर्मचारी अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक उनके साथी बाहर नहीं आते वो सब काम पर वापस नहीं लौटेंगे। दूसरी तरफ , जिम्स के निदेशक वीडियो संदेश के जरिए कर्मचारियों को बिना किसी दंड के डर के काम पर लौटने का भरोसा दिला रहे हैं। तीन मांगों पर छिड़ा संघर्ष जिम्स में आउटसोर्स कर्मियों ने 15 जून से अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन शुरू किया था । कर्मचारियों की सबसे अहम मांग है की उन्हें परमानेंट बनाना या कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त करना। इसके अतिरिक्त, अस्पताल प्रशासन द्वारा हाल में की गई नई भर्ती को तुरंत खारिज करने की मांग भी उठाई है। इन मांगों के कारण कर्मचारी अस्पताल परिसर में अड़े हुए हैं। वार्ता विफल, पुलिस कार्रवाई पर आक्रोश जिला प्रशासन, पुलिस और जिम्स प्रबंधन के बीच हड़ताल ख़तम करने के लिए कई बार बातचीत हुई, जो पूरी तरह असफल रही। कर्मचारियों का कहना है कि 24 जून को लगभग छह घंटे चली सबसे लंबी बातचीत के बेनतीजा होने के बाद, प्रबंधन के कहने पर पुलिस ने उन्हें ज़बरदस्ती धरना स्थल से हटा दिया। इस दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 9 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जिससे कर्मचारियों का गुस्साऔर बढ़ गया। रिहाई बनाम आश्वासन की जंग कर्मचारियों ने रविवार को साफ कह दिया कि जब तक उनके कैद साथी मुक्त नहीं किए जाते और उन पर की गई कानूनी कार्रवाई वापस नहीं ली जाएगी , तब तक वे अपनी जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे। वहीं, जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने कहा है कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होगी और सभी को एक सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि निदेशक की अपील के बाद कुछ कर्मचारियों ने अपनी ड्यूटी फिर से जॉइन कर ली है। ये भी पढ़े : यूपी ग्लोबल बिजनेस का नया हब, ट्रेड शो में जुटेगा दुनिया का कारोबार