Operation Sindoor Controversy: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए बयान पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो और पोस्ट के बाद केंद्र सरकार ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि रक्षा मंत्री के बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया है, जिससे लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। वायरल दावों पर जवाब रक्षा मंत्रालय के अनुसार, संसद में जुलाई 2025 के दौरान दिए गए भाषण का केवल एक छोटा हिस्सा साझा किया गया, जबकि पूरे बयान का संदर्भ अलग था। मंत्रालय का कहना है कि इस तरह की चुनिंदा प्रस्तुति से ऐसा भ्रम पैदा किया गया कि रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी भारतीय सैनिक के शहीद न होने का दावा किया था। सरकार ने इस व्याख्या को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। विपक्ष का हमला विवाद उस समय और बढ़ गया जब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर राजनाथ सिंह के संसद भाषण का वीडियो साझा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान छह सैन्यकर्मियों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था, तो या तो रक्षा मंत्री उस तथ्य से अनजान थे या फिर उन्होंने संसद को सही जानकारी नहीं दी। इस पोस्ट के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया। सरकार की दलील केंद्र सरकार ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि रक्षा मंत्री का बयान उस समय फैलाए जा रहे एक विशेष दावे के जवाब में था। मंत्रालय के अनुसार, कुछ माध्यमों में यह नैरेटिव चलाया जा रहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अपने लड़ाकू पायलट खो दिए थे। संसद में राजनाथ सिंह की टिप्पणी इसी दावे का जवाब थी, न कि पूरे सैन्य अभियान के दौरान हुए सभी घटनाक्रम का विवरण। वीरता पुरस्कार सम्मान रक्षा मंत्रालय ने यह भी कहा कि देश ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वीरगति प्राप्त करने वाले सभी सैनिकों को पूरा सम्मान दिया है। सरकार का कहना है कि इन बहादुर जवानों को समय-समय पर औपचारिक श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके सर्वोच्च बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। मंत्रालय ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित सैनिकों को वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जो उनके साहस और योगदान की आधिकारिक मान्यता है। तथ्य छिपाने से इनकार सरकार ने यह भी याद दिलाया कि 11 मई 2025 को आयोजित एक आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन सैन्य संचालन महानिदेशक ने सार्वजनिक रूप से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी थी। मंत्रालय का कहना है कि उस समय उनके बलिदान का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था, इसलिए यह कहना कि सरकार ने इस तथ्य को छिपाया, सही नहीं है। आरोप-प्रत्यारोप जारी इस पूरे घटनाक्रम के बाद ऑपरेशन सिंदूर एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि केंद्र का कहना है कि तथ्यों को अधूरा दिखाकर भ्रम फैलाया जा रहा है। फिलहाल यह विवाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर बहस और तेज होने की संभावना है। ये भी पढ़ें: सिया आखिर क्यों खामोश रही? लोहागढ़ किले पर रीक्रिएशन के दौरान सामने आई जांच की नई परतें