उत्तर प्रदेशनोएडा

नोएडा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम, बुजुर्गों को निशाना बनाकर ठग खाली कर रहे हैं बैंक खाते, जाने कैसे बचें?

नोएडा में 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम से बुजुर्गों के लाखों रुपये ठगे जा रहे हैं। ठग पुलिस बनकर डराते हैं और वीडियो कॉल पर खाते खाली करवा लेते हैं। सावधान रहें, 1930 पर रिपोर्ट करें।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Noida Cyber Crime News Today: नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नामक साइबर फ्रॉड का खतरनाक ट्रेंड तेजी से बढ़ा है, जिसमें ठग पुलिस, सीबीआई, ईडी या कोर्ट के अधिकारी बनकर बुजुर्गों को डरा-धमकाकर उनके बैंक खाते खाली कर रहे हैं। हाल के सप्ताहों में अकेले नोएडा में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें बुजुर्ग दंपत्ति या अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों से 18 लाख से लेकर 58 लाख रुपये तक की ठगी हुई है।

डिजिटल अरेस्ट क्या है?

‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर अपराध का एक नया और खतरनाक रूप है, जिसमें ठग वीडियो कॉल, व्हाट्सएप या स्काइप के जरिए पीड़ित को अपने कब्जे में ले लेते हैं। वे खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, एटीएस या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते हुए पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी, आतंकवाद या मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोपों में फंसाने की धमकी देते हैं।

इसके बाद वे पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रख लेते हैं यानी उन्हें किसी से संपर्क करने, घर से बाहर निकलने या पुलिस स्टेशन जाने से मना कर देते हैं। पीड़ित को घंटों या दिनों तक वीडियो कॉल पर रखा जाता है, जिससे वह मानसिक रूप से टूट जाता है और ठगों के हर निर्देश का पालन करने लगता है।

नोएडा के हालिया मामले: बुजुर्ग कैसे बने शिकार

  • 58 लाख रुपये की ठगी का मामला (अगस्त 2026)

नोएडा के सेक्टर-50 में रहने वाले 70 वर्षीय एक बुजुर्ग दंपत्ति के साथ अगस्त 2026 में यह घटना घटी। 11 अगस्त को उनके लैंडलाइन पर एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को एयरटेल का कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव बताया और कहा कि पत्नी का आधार कार्ड और बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग केस में शामिल है।

इसके बाद ठगों ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए दंपत्ति को संपर्क किया और खुद को मुंबई पुलिस के साइबर अधिकारी बताते हुए गिरफ्तारी का डर दिखाया। दंपत्ति को 11 से 18 अगस्त तक (लगभग 7-8 दिन) ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया, जिस दौरान उन्हें किसी से बात करने या बाहर जाने की इजाजत नहीं थी।

ठगों ने ‘जांच में सहयोग’ और ‘खाते सत्यापन’ के बहाने दंपत्ति से सात लेनदेन में कुल 58.30 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए—जिनमें से 44.5 लाख रुपये पति के खाते से और 13.8 लाख रुपये संयुक्त खाते से निकाले गए। पैसे ट्रांसफर होने के बाद ठगों ने अचानक संपर्क तोड़ लिया, तब दंपत्ति को एहसास हुआ कि वे ठगे गए हैं।

  • 22 लाख रुपये की ठगी (अगस्त 2026)

नोएडा के एक अन्य बुजुर्ग के साथ अगस्त 2026 में ठगों ने मुंबई पुलिस के साइबर अधिकारी बनकर संपर्क किया और मनी लॉन्ड्रिंग व मानव तस्करी केस में फंसाने की धमकी दी। पीड़ित को एक दिन के लिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया और आरटीजीएस के जरिए 22 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।

  • 18 लाख रुपये की ठगी: आतंकवाद का झूठा आरोप

अगस्त 2026 में नोएडा के एक बुजुर्ग को ठगों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया। एटीएस अधिकारी बनकर ठगों ने फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजा और पीड़ित को डराकर 18 लाख रुपये अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लिए।

  • 44 लाख रुपये की ठगी: दो बुजुर्ग महिलाएं निशाने पर

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में दो बुजुर्ग महिलाओं (जिनमें एक रिटायर्ड कर्नल की पत्नी भी शामिल थी) को मुंबई क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर मनी लॉन्ड्रिंग केस का डर दिखाया गया। ठगों ने वर्दी पहने वीडियो कॉल पर नाटक किया और दोनों महिलाओं से कुल 44 लाख रुपये (एक से 19.91 लाख और दूसरी से 24 लाख के करीब) आरटीजीएस और यूपीआई के जरिए ठग लिए।

ठगों की कार्यशैली

1. पहला संपर्क: ठग पहले टेलीकॉम कंपनी, बैंक या कूरियर सर्विस के कर्मचारी बनकर फोन करते हैं और आधार कार्ड या बैंक खाते के दुरुपयोग की बात करते हैं।
2. पुलिस/एजेंसी का भेष: फिर वे पुलिस, सीबीआई, ईडी, एटीएस या कोर्ट के अधिकारी बनकर व्हाट्सएप या स्काइप पर वीडियो कॉल करते हैं।
3. डर का माहौल: वे पीड़ित को गंभीर आपराधिक मामलों (मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स, आतंकवाद, मानव तस्करी) में फंसाने की धमकी देते हैं और फर्जी वारंट या दस्तावेज दिखाते हैं।
4. डिजिटल अरेस्ट: पीड़ित को ‘जांच’ के नाम पर घर में ही कैद कर लिया जाता है किसी से संपर्क करने, पुलिस स्टेशन जाने या परिवार को बताने से मना कर दिया जाता है।
5. पैसे ट्रांसफर: ‘खाते सत्यापन’, ‘जांच में सहयोग’ या ‘गिरफ्तारी वारंट से बचाव’ के बहाने पीड़ित से आरटीजीएस, यूपीआई या नेट बैंकिंग के जरिए कई बार पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं।
6. संपर्क तोड़ना: एक बार पैसे निकल जाने के बाद ठग अचानक संपर्क तोड़ लेते हैं और पीड़ित को अकेला छोड़ देते हैं।

क्यों बुजुर्ग आसान शिकार?

तकनीकी जानकारी की कमी: कई बुजुर्ग डिजिटल ट्रांजैक्शन, वीडियो कॉल फ्रॉड या साइबर सुरक्षा के बारे में कम जानते हैं।
अधिकारियों का डर: वे पुलिस, सीबीआई या कोर्ट जैसे नाम सुनकर घबरा जाते हैं और तुरंत विश्वास कर लेते हैं।
अकेलापन: कई बुजुर्ग अकेले रहते हैं या दिनभर घर पर होते हैं, जिससे ठगों को उन्हें लंबे समय तक कंट्रोल में रखना आसान हो जाता है।
मानसिक दबाव: लगातार वीडियो कॉल पर रहने और डर के माहौल में वे तर्कशक्ति खो देते हैं और ठगों के हर निर्देश का पालन करने लगते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और सरकारी कार्रवाई

अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम से निपटने के लिए 13 बिंदुओं वाले निर्देश जारी किए हैं, जिनमें RBI को चार सप्ताह में मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने कहा है कि पुलिस, सीबीआई, ईडी या कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती। साथ ही, केंद्र सरकार ने चीन से जुड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है और कई प्रमुख ऑपरेटरों को गिरफ्तार किया है, जो 1,090 से अधिक मामलों और 10.71 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी से जुड़े थे।

कैसे बचें? बुजुर्गों और परिवारों के लिए सलाह

तुरंत कॉल काटें: अगर कोई पुलिस, सीबीआई, ईडी, कोर्ट या बैंक अधिकारी बनकर फोन करे और पैसे ट्रांसफर करने या ‘डिजिटल अरेस्ट’ की बात करे, तो तुरंत कॉल काट दें।
किसी से संपर्क करें: तुरंत परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।
1930 हेल्पलाइन: साइबर फ्रॉड की शिकायत के लिए तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज कराएं।
ओटीपी/बैंक डिटेल्स न शेयर करें: कभी भी ओटीपी, पासवर्ड, एटीएम पिन, आधार कार्ड की कॉपी या बैंक डिटेल्स किसी के साथ शेयर न करें।
परिवार को जागरूक करें: बुजुर्ग माता-पिता को इस फ्रॉड के बारे में बताएं और उन्हें समझाएं कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसे नहीं मांगती।
वीडियो कॉल पर भरोसा न करें: ठग वर्दी पहनकर या फर्जी आईडी दिखाकर वीडियो कॉल पर भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं तो इस पर कभी भरोसा न करें।

साइबर ठगी पर अलर्ट

नोएडा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम ने बुजुर्गों को विशेष रूप से निशाना बनाया है और करोड़ों रुपये की ठगी की है। यह फ्रॉड न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि पीड़ितों को गहरा मानसिक आघात भी देता है। परिवारों, पुलिस और सरकारी एजेंसियों को मिलकर बुजुर्गों को जागरूक करने और इस फ्रॉड से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। अगर आप या आपका कोई परिचित इस तरह के फ्रॉड का शिकार हुआ है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम सेल (1930) से संपर्क करें।

ये भी पढ़ें: स्टॉक मार्केट में मुनाफे का झांसा, नोएडा में 1.13 करोड़ की साइबर ठगी

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Translate »