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मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, पेपर लीक पर 10 साल जेल और 10 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान

मोदी कैबिनेट ने संशोधित पेपर लीक बिल को मंजूरी दी। दोषियों के लिए 10 साल जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान होगा। CJP के साथ सरकार की वार्ता भी जारी है।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Cabinet Meeting: देशभर में पेपर लीक को लेकर बढ़ते विरोध और छात्रों के आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को एक साथ दो बड़े कदम उठाए। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में संशोधित पेपर लीक कानून के मसौदे को मंजूरी दी गई, वहीं दूसरी ओर आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के साथ सरकार ने बातचीत कर विवाद का समाधान निकालने की कोशिश की। सरकार का संदेश साफ है कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी और साथ ही आंदोलनरत छात्रों की चिंताओं को भी संवाद के जरिए दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

कैबिनेट ने दी संशोधित विधेयक को मंजूरी

शुक्रवार को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) और कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की बैठकों के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल की अहम बैठक हुई। इस दौरान पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 को और अधिक सख्त बनाने के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार ने संशोधित विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है और अब इसे अगले सप्ताह संसद के मानसून सत्र में पेश किए जाने की तैयारी है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

पेपर लीक माफिया पर कसेगा शिकंजा

प्रस्तावित संशोधित कानून में पेपर लीक से जुड़े अपराधों के लिए पहले से कहीं अधिक कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति परीक्षा प्रश्नपत्र लीक करने या उससे जुड़े संगठित अपराध में दोषी पाया जाता है, तो उसे 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट को कानूनी आधार दिया जाएगा। इन अदालतों को यह अधिकार होगा कि वे जांच पूरी होने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर मामलों का निपटारा करें, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके और न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

PM पहले ही दे चुके हैं सख्त संदेश

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल परीक्षा में गड़बड़ी नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर अपराध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि सरकार दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था लागू करेगी।

CJP के साथ भी हुई अहम बातचीत

उधर, छात्र आंदोलन को देखते हुए केंद्र सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत की। नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में हुई इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। CJP की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय करने और आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने जैसी मांगें रखी गईं। संगठन ने पहले सरकारी कार्यालय में बैठक से इनकार करते हुए तटस्थ स्थान पर बातचीत की मांग की थी, जिसके बाद कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बैठक आयोजित की गई।

कानून भी सख्त

सरकार फिलहाल दोहरी रणनीति पर काम करती नजर आ रही है। एक ओर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए सख्त कानूनी ढांचे को अंतिम रूप दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आंदोलन कर रहे छात्रों और उनके प्रतिनिधियों से लगातार संवाद के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। अब सबकी निगाहें संसद में पेश होने वाले संशोधित विधेयक और सरकार-CJP के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी हैं।

ये भी पढ़ें: सरकार और CJP की बैठक में क्या निकला नतीजा, दो मांगों पर बनी सहमति, लेकिन एक फैसले पर अब भी टकराव!

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