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जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की बिगड़ी तबीयत, ममता बनर्जी ने फोन पर की बात

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के 15 दिन बाद तबीयत बिगड़ गई। ममता बनर्जी ने फोन पर हालचाल जाना और छात्रों को न्याय दिलाने की मांग वाले आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Sonam Wangchuk Hunger Strike: दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी अनिश्चितकालीन अनशन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने से चिंता बढ़ गई है। 15 दिनों से अधिक समय से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक की सेहत को लेकर समर्थकों और आम लोगों में चिंता का माहौल है। देशभर से लोग उन्हें अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, वहीं आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है।

ममता का समर्थन

इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने सोनम वांगचुक से फोन पर बात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने वांगचुक से हिम्मत बनाए रखने की अपील की और छात्रों को न्याय दिलाने की मांग का समर्थन जताया। ममता बनर्जी के इस कदम को आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक समर्थन माना जा रहा है।

CJP आंदोलन को मिला समर्थन

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया के जरिए ममता बनर्जी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि ममता बनर्जी ने न केवल सोनम वांगचुक की सेहत की चिंता जताई, बल्कि छात्रों के हित में चल रहे आंदोलन के प्रति भी अपनी एकजुटता दिखाई। दिपके ने कहा कि यह समर्थन आंदोलन से जुड़े लोगों का मनोबल बढ़ाने वाला है।

20 जून से चल रहा है प्रदर्शन

यह आंदोलन 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी है। इसकी शुरुआत कथित नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर की गई थी। आंदोलन में शुरुआत से ही सोनम वांगचुक सक्रिय रूप से शामिल रहे। बाद में उन्होंने घोषणा की थी कि यदि तय समय तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो वह आमरण अनशन शुरू करेंगे। सरकार की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद उन्होंने 28 जून से भूख हड़ताल शुरू कर दी।

सेहत को लेकर बढ़ी चिंता

लगातार अनशन के कारण सोनम वांगचुक की तबीयत पर असर पड़ने की खबरें सामने आ रही हैं। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए कई सामाजिक संगठनों, समर्थकों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है। आंदोलनकारी लगातार यह मांग कर रहे हैं कि कथित परीक्षा विवाद से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए जिम्मेदार लोगों पर जवाबदेही तय हो।

फिलहाल जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है और अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है। वहीं, सोनम वांगचुक की सेहत और आंदोलन को मिल रहे बढ़ते राजनीतिक समर्थन ने पूरे मामले को नई चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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