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120 की रफ्तार, बिना टोल प्लाजा कटेगा टैक्स! आखिर कैसे बना देश का सबसे महंगा एक्सप्रेसवे?

लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे शुरू हुआ। 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार, बिना टोल प्लाजा ऑटोमैटिक टोल कटेगा। 63 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर देश का सबसे महंगा टोल लागू होगा।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

UP Expressway: उत्तर प्रदेश को मंगलवार से एक और आधुनिक एक्सप्रेसवे की सौगात मिल गई। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। यह सिर्फ तेज रफ्तार सफर ही नहीं, बल्कि देश की सबसे आधुनिक टोल प्रणाली के कारण भी चर्चा में है। हालांकि इसकी सबसे बड़ी खासियत के साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है यह देश का सबसे महंगा एक्सप्रेसवे क्यों माना जा रहा है?

करीब 63 किलोमीटर लंबे इस छह लेन एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे पर वाहन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगे। इसके शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच का सफर करीब 45 से 50 मिनट में पूरा हो जाएगा, जिससे लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

देश में सबसे ज्यादा प्रति किलोमीटर टोल

एनएचएआई की निर्धारित दरों के अनुसार इस एक्सप्रेसवे पर कार, जीप और वैन के लिए एक तरफ का टोल 275 रुपये रखा गया है। यानी प्रति किलोमीटर लगभग 4.37 रुपये का शुल्क देना होगा। यही वजह है कि यह देश के प्रमुख एक्सप्रेसवे में सबसे महंगा माना जा रहा है।

तुलना करें तो मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर प्रति किलोमीटर टोल लगभग 3.39 रुपये, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर 3.23 रुपये और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर 3.21 रुपये है। वहीं गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे पर यह करीब 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर है। आगरा–लखनऊ, बुंदेलखंड और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की टोल दरें इससे काफी कम हैं। इस हिसाब से लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर प्रति किलोमीटर शुल्क गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे की तुलना में लगभग 71 प्रतिशत अधिक और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से दोगुने से भी ज्यादा है।

चलते-चलते कटेगा पैसा

इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बैरियर-फ्री टोलिंग प्रणाली है। यहां कहीं भी पारंपरिक टोल प्लाजा नहीं बनाए गए हैं। वाहन चालक बिना रुके सफर करेंगे और आरएफआईडी (Fastag) तथा ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक की मदद से टोल अपने आप कट जाएगा। इससे जाम की समस्या खत्म होगी और यात्रा अधिक सुगम बनेगी।

हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था

पूरे एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से लैस किया गया है। मार्ग पर 80 से अधिक हाई-डेफिनिशन कैमरे, 16 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम और स्पीड राडार लगाए गए हैं। किसी भी दुर्घटना या आपात स्थिति में महज 15 मिनट के भीतर राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंच सकेगा। इससे यात्रियों की सुरक्षा पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत होगी।

4200 करोड़ की लागत

करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे का लोकार्पण सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उन्नाव के झाऊखेड़ा में किया। मंगलवार सुबह आठ बजे से इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया।

इन जिलों को मिलेगा सीधा लाभ

इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, हरदोई, अयोध्या और सुल्तानपुर के लोगों को मिलेगा। एक्सप्रेसवे को कानपुर-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग और उन्नाव-लालगंज मार्ग से भी जोड़ा गया है, जिससे आसपास के जिलों के लोगों की आवाजाही पहले से कहीं आसान हो जाएगी।

यात्रा होगी तेज

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे आधुनिक तकनीक, बेहतर सुरक्षा और कम यात्रा समय जैसी कई सुविधाएं लेकर आया है। हालांकि, देश में सबसे अधिक प्रति किलोमीटर टोल दर होने के कारण यह परियोजना चर्चा के केंद्र में है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि तेज और सुविधाजनक सफर के बदले अधिक टोल चुकाने को लोग किस तरह स्वीकार करते हैं।

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