Divya Mittal Politics: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से इस्तीफा देने के बाद पूर्व अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में कदम रखने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनका मकसद किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़ना नहीं, बल्कि आम लोगों की आवाज बनना है। उनके बयान के बाद अब यह सवाल भी उठने लगा है कि वह चुनावी राजनीति की शुरुआत कहां से करेंगी। मिर्जापुर से उनके लंबे जुड़ाव को देखते हुए उनके यहां से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हैं। सियासी बड़ा ऐलान दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में अपने इस्तीफे के बाद उठ रहे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले उन्होंने IAS की सेवा से त्यागपत्र दिया था, लेकिन तत्काल यह नहीं बताया कि आगे उनका रास्ता क्या होगा। अब उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका अगला कदम राजनीति है। https://twitter.com/divyamittal_IAS/status/2104769086446280938 ‘मुझे पद नहीं लोगों की आवाज बनना है' पूर्व IAS अधिकारी ने कहा कि लोग उनसे पूछ रहे थे कि जब वह बहुत कुछ हासिल कर चुकी हैं तो अब और क्या चाहती हैं। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें उन लोगों की आवाज बनना है, जिनकी बात सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती और पहुंचने के बाद भी कई बार सुनी नहीं जाती। दिव्या मित्तल ने कहा कि वह देश की आजादी के 80 वर्षों का हिसाब चाहती हैं। उनके मुताबिक राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि आम लोगों की समस्याओं और उनके अधिकारों पर काम करना होना चाहिए। उन्होंने अपनी राजनीति को ‘इरादे, न्याय, फिक्र और सोच की राजनीति’ बताया। साथ ही कहा कि उनका लक्ष्य किसी एक राजनेता को बदलना नहीं, बल्कि राजनीति के तरीके में बदलाव लाना है। एक महिला की मांग ने बदल दी सोच दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक कार्यकाल का एक अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह लहुरियादह की पहाड़ी इलाके में पानी पहुंचाने के काम का निरीक्षण कर रही थीं। इसी दौरान एक महिला उनके पास अपनी मांग लेकर पहुंची। उन्हें लगा कि महिला शायद पेंशन, आवास या पानी जैसी किसी बुनियादी सुविधा की मांग करेगी। लेकिन महिला ने अपने गांव में पांचवीं कक्षा के बाद भी स्कूल की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की। दिव्या के मुताबिक, उस समय महिला के अपने घर में पानी की सुविधा तक नहीं थी, फिर भी उसकी प्राथमिकता बच्चों की पढ़ाई थी। उन्होंने संबंधित नियमों को देखा और स्कूल को मंजूरी भी दिलाई। लेकिन उनके अनुसार तीन साल बाद भी स्कूल का निर्माण शुरू नहीं हो सका। उन्होंने इसी उदाहरण के जरिए सवाल उठाया कि जब पैसा, नियम और मंजूरी उपलब्ध थी तो काम क्यों नहीं हुआ? उनका कहना था कि समस्या केवल ‘इरादे’ की थी। उन्होंने कहा कि अगर इरादा हो तो पहाड़ भी रास्ता दे सकता है, लेकिन इरादे की कमी में एक फाइल भी पहाड़ जैसी बाधा बन जाती है। जमीन का पट्टा मिला लेकिन कब्जा नहीं दिव्या मित्तल ने राजस्व विभाग में काम के दौरान का एक और मामला साझा किया। उनके अनुसार एक भूमिहीन व्यक्ति सरकारी जमीन के पट्टे से जुड़े दस्तावेज लेकर उनके पास पहुंचा था। उसके पास कागज तो थे, लेकिन जमीन पर कब्जा नहीं मिला था। उन्होंने दस्तावेजों की जांच कराई तो संबंधित रिपोर्ट गलत पाई गई। अधिकारियों से बातचीत के बाद रिपोर्ट वापस कराई गई और जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई भी हुई। इसके बाद असली चुनौती जमीन पर कब्जा दिलाने की थी। दिव्या ने बताया कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क किया, लेकिन वहां से जवाब मिला कि ‘ऊपर से मना किया गया है।’ इसी बात पर उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर वह ‘ऊपर’ कौन है, जबकि संविधान में जनता को सर्वोच्च माना गया है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को न्याय दिलाना किसी की कृपा नहीं, बल्कि उसका अधिकार होना चाहिए। सड़क, गड्ढे और मौतों का भी उठाया मुद्दा पूर्व IAS अधिकारी ने गांवों की खराब सड़क व्यवस्था और पुलों की कमी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज भी ऐसे हजारों गांव हैं जहां सड़क नहीं है और नदी होने के बावजूद पुल नहीं है। बरसात के दौरान कई गांवों का संपर्क तक प्रभावित हो जाता है। उन्होंने सड़कों पर मौजूद गड्ढों को लेकर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि प्रशासन को कई बार यह जानकारी होती है कि सड़क कहां खराब है, फाइल किस स्तर पर है और दुर्घटनाओं में कितनी जानें गई हैं। इसके बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं होती। दिव्या ने कहा कि जब किसी समस्या की जानकारी होने के बावजूद उसके समाधान की चिंता नहीं की जाती, तो हादसे केवल दुर्घटना नहीं रह जाते। उन्होंने ऐसी मौतों का भी हिसाब मांगने की बात कही। युवाओं के भविष्य और AI को लेकर चिंता दिव्या मित्तल ने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश के लाखों युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण उनका भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव का भी जिक्र किया। उनका सवाल था कि आने वाले समय में जब AI बड़ी संख्या में काम करने लगेगा तो युवाओं के रोजगार और भविष्य को लेकर क्या तैयारी की जा रही है। दो बेटियों की मां होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की भी चिंता है। उनके मुताबिक, हर सवाल का जवाब तुरंत मिलना जरूरी नहीं, लेकिन कम से कम इन सवालों पर गंभीर चर्चा तो होनी चाहिए। ‘किसी दल के साथ नहीं, केवल लोगों के साथ’ दिव्या मित्तल ने कहा कि मौजूदा राजनीति में सत्ता, शिलान्यास और राजनीतिक गतिविधियां तो दिखाई देती हैं, लेकिन उनके मुताबिक दीर्घकालिक सोच और जनसरोकारों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने दावा किया कि IAS से इस्तीफा देने के बाद उन्हें आम लोगों का समर्थन मिला, लेकिन एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ने उनके बारे में दूसरी पार्टी के एक बड़े नेता से मुलाकात का दावा किया। दिव्या ने इस दावे को गलत बताया और कहा कि ऐसी कोई मुलाकात हुई ही नहीं थी। उन्होंने इसी अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के झंडे के नीचे राजनीति नहीं करना चाहतीं। उनका कहना है कि अगर किसी दल का हिस्सा बनकर काम किया जाए तो उसी व्यवस्था से सवाल करना मुश्किल हो जाता है। शुरुआत उत्तर प्रदेश से करने का ऐलान दिव्या मित्तल ने कहा कि उत्तर प्रदेश उनकी ‘कर्मभूमि’ रहा है और इसलिए उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भी इसी राज्य से होगी। उन्होंने उत्तर प्रदेश के लोगों की क्षमता और लोकतंत्र में उनके भरोसे का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि बदलाव संभव है। उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभव का उदाहरण देते हुए कहा कि कई जगह आम लोगों ने खुद आगे बढ़कर ऐसे काम किए, जिन्हें प्रशासन के लिए भी पूरा करना मुश्किल था। देवरिया में कथित ‘ऑपरेशन कब्जा मुक्ति’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों ने खुद सरकारी जमीन से कब्जे हटाए थे। उनके मुताबिक, यही जनता बदलाव की असली ताकत है। मिर्जापुर से चुनाव लड़ने की अटकलें दिव्या मित्तल अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान मिर्जापुर में सक्रिय रही हैं और जिले से उनका पुराना जुड़ाव रहा है। इसी वजह से उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर मिर्जापुर का नाम चर्चा में है। हालांकि, उन्होंने अभी किसी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं की है। उन्होंने अपने वीडियो के अंत में लोगों से किसी नेता या ‘मसीहा’ का इंतजार करने के बजाय खुद पर भरोसा करने की अपील की। उनके इस सियासी ऐलान के बाद अब देखना होगा कि पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल की राजनीतिक यात्रा किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या वह चुनावी मैदान में उतरकर अपनी नई पारी शुरू करती हैं। ये भी पढ़ें: UP में 2027 से पहले अखिलेश का बड़ा ऐलान, OPS से मदरसा शिक्षकों तक… मेनिफेस्टो की दिखी झलक