CBSE Third Language Policy: सीबीएसई की तीन-भाषा व्यवस्था को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छठी कक्षा के छात्रों को अहम राहत दी। अदालत ने निर्देश दिया कि मौजूदा कक्षा 6 के विद्यार्थियों को वही संक्रमणकालीन छूट मिलेगी, जो पहले कक्षा 7 से 9 के छात्रों को दी गई है। 10वीं में नहीं होगी तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा इस व्यवस्था का सबसे बड़ा असर कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा पर पड़ेगा। तीसरी भाषा के लिए छात्रों का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा। इसे कक्षा 10 की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा का हिस्सा नहीं बनाया जाएगा। यानी तीसरी भाषा में प्रदर्शन का बोर्ड स्तर पर पास या फेल होने से संबंध नहीं होगा। सुनवाई के दौरान अदालत ने बच्चों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव को लेकर भी चिंता जताई। इससे पहले भी पीठ ने कहा था कि नई भाषा व्यवस्था लागू करते समय छात्रों पर अनावश्यक बोझ नहीं पड़ना चाहिए। सरकार और याचिकाकर्ताओं की अलग-अलग दलील केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने व्यवस्था के मौजूदा शैक्षणिक सत्र से लागू होने का पक्ष रखा। सरकार का कहना है कि अधिकांश स्कूलों में जरूरी संसाधन और अध्ययन सामग्री उपलब्ध है। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने भाषा विकल्पों की कमी, शिक्षकों की उपलब्धता और ग्रामीण क्षेत्रों में किताबों की समस्या जैसे मुद्दे उठाए। उनका तर्क है कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले स्कूलों की वास्तविक तैयारियों को देखा जाना चाहिए। स्कूलों की सुविधाओं पर भी नजर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई को उन स्कूलों की समस्याएं पता करने के लिए अधिकारी नियुक्त करने को कहा है, जहां तीन-भाषा व्यवस्था के लिए जरूरी सुविधाएं अभी पूरी नहीं हुई हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आंतरिक मूल्यांकन के नाम पर किसी छात्र को अनुचित रूप से रोकने की स्थिति में वह हस्तक्षेप कर सकती है। तीन-भाषा नीति का विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। भाषा के विकल्प, शिक्षकों की उपलब्धता और अलग-अलग बोर्डों में इसके क्रियान्वयन जैसे सवालों पर आगे भी सुनवाई जारी रहने की संभावना है। ये भी पढ़ें: SIR पर देशभर में सियासी घमासान, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग! मुंबई से असम तक सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी