Ram Mandir Donation Theft Rumors: अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। दान राशि में कथित अनियमितता के आरोपों के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल (SIT) गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है। दिलचस्प बात यह है कि जिस मामले को लेकर शुरुआत में केवल आरोप-प्रत्यारोप हो रहे थे, वह अब आधिकारिक जांच की मांग तक पहुंच चुका है। अखिलेश यादव की पोस्ट से शुरू हुई बहस इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई दान राशि में गड़बड़ी और धनराशि गायब होने की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। अखिलेश यादव के इस बयान के बाद मामला तेजी से राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया। विपक्षी दलों ने पारदर्शिता की मांग उठाई, जबकि समर्थक पक्ष ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई और अलग-अलग दावे सामने आने लगे। ट्रस्ट ने आरोपों को बताया भ्रामक विवाद बढ़ने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। ट्रस्ट ने कहा कि मंदिर में आने वाली दान राशि का नियमित ऑडिट किया जाता है और वित्तीय प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित नियमों के तहत संचालित होती है। ट्रस्ट के अधिकारियों का कहना है कि बैंक और ट्रस्ट प्रतिनिधियों की मौजूदगी में धनराशि की गिनती और लेखा-जोखा रखा जाता है। हालांकि, इसी बीच कुछ ऐसे आरोप भी सामने आए जिनमें दान राशि के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की बात कही गई। इन दावों ने विवाद को और गहरा कर दिया। आखिर SIT जांच की मांग क्यों उठी? मामले में लगातार फैल रही अफवाहों, राजनीतिक बयानबाजी और अलग-अलग दावों के बीच ट्रस्ट ने स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से SIT जांच कराने का अनुरोध किया है। ट्रस्ट का कहना है कि इस मामले में कई तरह की बातें सामने आ रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। ट्रस्ट चाहता है कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच एजेंसी पूरे प्रकरण की पड़ताल करे ताकि सच्चाई सामने आ सके। साथ ही यदि किसी स्तर पर कोई गड़बड़ी या लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। दान प्रबंधन व्यवस्था पर भी उठे सवाल ट्रस्ट कैंप कार्यालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, पहले मंदिर में आने वाली दान राशि को एक अलग प्रक्रिया के तहत एकत्रित कर बैंक तक भेजा जाता था। बाद में व्यवस्था में बदलाव करते हुए बैंक की ओर से मंदिर परिसर में ही काउंटर और कर्मचारियों की तैनाती की गई। कुछ अधिकारियों का दावा है कि इसी व्यवस्था के दौरान धनराशि के प्रबंधन को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। ट्रस्ट कैंप कार्यालय के प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने भी कहा कि पहले कुछ लोगों ने कथित गड़बड़ियों की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई थी। हालांकि उस समय कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई। अभी तक क्या सामने आया है? सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अब तक किसी आधिकारिक जांच एजेंसी या ऑडिट रिपोर्ट ने करोड़ों रुपये की चोरी, गबन या वित्तीय घोटाले की पुष्टि नहीं की है। एक ओर आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर ट्रस्ट इन आरोपों को खारिज करते हुए नियमित ऑडिट और पारदर्शी प्रक्रिया का दावा कर रहा है। यही वजह है कि फिलहाल इस पूरे प्रकरण को "दान राशि में कथित अनियमितता का विवाद" माना जा रहा है, न कि सिद्ध वित्तीय घोटाला। अब सभी की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी है। यदि SIT का गठन होता है तो जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है या नहीं। फिलहाल राम मंदिर दान विवाद आस्था, राजनीति और पारदर्शिता के सवालों के बीच एक बड़े मुद्दे के रूप में उभर चुका है। ये भी पढ़ें: देश को मिला नया सेना प्रमुख, 30 जून से कमान संभालेंगे लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ