Noida Rama Hospital Case: नोएडा सेक्टर-61 स्थित रामा अस्पताल में 52 वर्षीय पुष्पा देवी की उपचार के दौरान हुई मौत के मामले में परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मृतका के बेटे मोहित शर्मा ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। महिला को 14 अप्रैल 2026 को हल्के बुखार और उल्टी की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, उनकी हालत में सुधार हो रहा था, लेकिन 15 अप्रैल को CECT जांच के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें गाजियाबाद स्थित यशोदा मेडिसिटी ले जाया गया, जहां 16 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया? 29 मई 2026 को CMO, गौतमबुद्धनगर के समक्ष प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में उपचार और रिकॉर्ड से जुड़ी कई कमियां दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, CECT के लिए प्राथमिक चिकित्सक की सहमति का रिकॉर्ड नहीं मिला। मरीज को रेडियोलॉजी ले जाने की रेफर स्लिप और CECT से पहले दिए गए टेस्टिंग डोज से संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं मिले। जांच समिति ने CECT के बाद मरीज की हालत बिगड़ने पर उपचार में देरी प्रतीत होने और नर्सिंग रिकॉर्ड में दर्ज sedation के लिए डॉक्टर के आदेश का रिकॉर्ड नहीं मिलने की बात भी कही है। समिति के अनुसार, अस्पताल प्रशासन और संबंधित चिकित्सक की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला और मांगे गए दस्तावेज भी पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं कराए गए। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के निर्देशों का भी सवाल मोहित शर्मा का कहना है कि मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के स्तर से निर्देश दिए जाने के बावजूद कार्रवाई लंबित रहना काफी गंभीर विषय है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जांच पूरी होने के बाद भी कार्रवाई में देरी किस स्तर पर और किस कारण से हुई। जांच के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं? मृतका के बेटे मोहित शर्मा के मुताबिक, यदि जांच के दौरान अस्पताल या संबंधित चिकित्सकों की भूमिका को लेकर कोई गंभीर तथ्य सामने आए हैं, तो विभाग की ओर से नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता या लापरवाही साबित नहीं हुई है, तो विभाग को इसकी स्थिति भी स्पष्ट करनी चाहिए। शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि मामले से जुड़े संबंधित डॉक्टरों को अब तक बयान या पूछताछ के लिए क्यों नहीं बुलाया गया। उनका कहना है कि जांच प्रक्रिया में सभी संबंधित पक्षों का बयान दर्ज किया जाना और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड की विस्तृत समीक्षा किया जाना आवश्यक है, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। अंतिम निष्कर्ष अभी बाकी! जांच समिति ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर किसी डॉक्टर या अस्पताल को सीधे तौर पर पुष्पा देवी की मौत का जिम्मेदार नहीं ठहराया है और अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना है। ऐसे में मामले की पूरी सच्चाई आगे की निष्पक्ष जांच और मेडिकल रिकॉर्ड के वैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। मृतका के बेटे मोहित शर्मा ने अस्पताल के CCTV फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज सुरक्षित कराने के साथ ही संबंधित डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन की भूमिका की जांच की मांग की है। अब नजर इस बात पर है कि जांच के आधार पर आगे क्या कार्रवाई होती है। ये भी पढ़ें: फोन पर बात कर रहा था पत्रकार, बाइक सवारों ने झपटा मोबाइल