उत्तर प्रदेशबहराइच

बहराइच कलेक्ट्रेट परिसर में हाई बोल्टेज ड्रामा, 15 लाख के चक्कर में हुई खींचतान, पुलिस बनी दर्शक

यूपी के बहराइच कलेक्ट्रेट परिसर में हाई बोल्टेज ड्रामा, अंदर हो रही थी डीएम की बैठक, बाहर 15 लाख के चक्कर में पुलिस के सामने ही हुई खींचतान, जाने पूरा मामला.....

Reported by AJAY SHARMA and edited by Shagun Chaurasia

Bahraich Strange Drama: यूपी के बहराइच कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर नवागत जिलाधिकारी जिले की प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे, वहीं ठीक कलेक्ट्रेट के बाहर एक जमीन रजिस्ट्री के मामले को लेकर जमकर खींचतान और अजब-गजब ड्रामा देखने को मिला। मामला चार साल पुराने जमीन सौदे और 15 लाख रुपये के लेनदेन से जुड़ा हुआ है। सबसे हैरानी की बात यह रही कि कलेक्ट्रेट परिसर जैसी संवेदनशील जगह पर हो रहे इस ड्रामे के दौरान वहाँ मौजूद पुलिस बल पूरी तरह मूकदर्शक बना रहा।

​क्या है पूरा मामला?

​गुलाम अलीपुरा निवासी पीड़ित व्यक्ति के अनुसार, चार साल पहले उसने चाकूजोत स्थित 22 लाख रुपये मूल्य की एक जमीन का सौदा किया था। इस सौदे के तहत उसने जमीन मालिक गिरजा पिता मुर्तजा को ₹15 लाख एडवांस दिए थे। ​हालाँकि, उक्त भूमि पर हाईकोर्ट से यथास्थिति स्टेटस को का स्टे आदेश प्रभावी था। दोनों पक्षों के बीच यह तय हुआ था कि जैसे ही हाईकोर्ट से स्टे हटेगा, बाकी बची राशि का भुगतान कर रजिस्ट्री बैनामा करा ली जाएगी।

चुपके से रजिस्ट्री कराने पहुंचे आरोपी

​पीड़ित का आरोप है कि बीते 17 तारीख को हाईकोर्ट से स्टे हट गया। लेकिन जमीन मालिक ने तय वादे के मुताबिक उसे जमीन देने के बजाय चोरी-छिपे दूसरी पार्टी को रजिस्ट्री कराने की योजना बना ली। ​हैरानी की बात तो यह रही कि जिस नई पार्टी को जमीन बेची जा रही थी, वे पीड़ित के ही रिश्ते के मामा, पति बांके लाल, पत्नी मीना देवी निकले। जब पीड़ित को रजिस्ट्रार ऑफिस के जरिए इसकी भनक लगी, तो वह मौके पर पहुँचा।

​कलेक्ट्रेट के बाहर मची खींचतान

​जैसे ही पीड़ित कलेक्ट्रेट स्थित रजिस्ट्रार ऑफिस पहुँचा, दोनों पक्षों के बीच कहा-सुनी और जमकर खींचतान शुरू हो गई। हंगामा बढ़ता देख आसपास के लोगों का जमावड़ा लग गया। कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात था, लेकिन पुलिसकर्मियों ने इस पूरे घटनाक्रम में बीच-बचाव करने या मामले को शांत कराने के बजाय मूकदर्शक बने रहना ही मुनासिब समझा।

जमीन हमारे नाम करें – पीड़ित

​पीड़ित ने बताया, ​ना हमारी गिरजा से दुश्मनी है, ना मामा से। अगर मामा जमीन खरीद रहे हैं, तो मुझे मेरा बकाया मूलधन और ब्याज लगभग ₹6.63 लाख वापस दे दिया जाए, या फिर तय वादे के मुताबिक जमीन हमारे नाम की जाए। ​पुलिस की ढिलाई और हंगामा बढ़ता देख आरोपी पक्ष मौक़े का फ़ायदा उठाकर चुपचाप खिसक गया।

​कलेक्ट्रेट परिसर बना चर्चा का केंद्र

​जिस समय कलेक्ट्रेट के बाहर रजिस्ट्री ऑफिस के समीप यह कहा-सुनी और खींचतान चल रही थी, उसी समय कलेक्ट्रेट सभागार में नवागत जिलाधिकारी जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक ले रहे थे। एक ही परिसर में एक तरफ प्रशासनिक गंभीरता और दूसरी तरफ पुलिस की मौजूदगी में ज़मीनी खींचतान का यह नज़ारा दिनभर कलेक्ट्रेट में चर्चा का विषय बना रहा। ​पीड़ित ने रजिस्ट्री कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है और अपने पैसों के भुगतान या ज़मीन दिलाए जाने की माँग की है।

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