Bahraich News: उत्तर प्रदेश के बहराइच कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग क्षेत्र के रिहायशी इलाकों के आसपास तेंदुए की आवाजाही और मवेशियों को नुकसान पहुंचाने की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए दो अलग-अलग रेंज में मचड़ा रहे 2 तेंदुए को वन विभाग की टीम ने सुरक्षित पिंजरे में कैद कर लिया। आपको बता दें कि पिछले 4 दिनों में कतर्नियाघाट क्षेत्र से यह चौथा तथा बीते 2 माह से भी कम समय में आबादी वाले गांवों के आसपास से 16वां तेंदुआ पकड़ा गया है। वहीं वन विभाग की टीमें संवेदनशील समय (तड़के एवं देर शाम/रात) में लगातार गश्त कर रही हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और वन्यजीवों से होने वाली क्षति को रोका जा सके। 1. सुजौली रेंज में तेंदुआ पिंजरे में कैद सुजौली रेंज के ग्राम सुजौली के मजरा भैंसाबुढ़ना में 12 सितंबर से 15 सितंबर, 2026 के मध्य तेंदुए द्वारा पालतू मवेशियों पर हमला कर उन्हें घायल करने की सूचनाएं प्राप्त हुई थीं। मौके पर निरीक्षण के दौरान तेंदुए के पदचिह्न (पगमार्क) पाए गए थे। ग्राम प्रधान एवं स्थानीय निवासियों के लिखित व मौखिक अनुरोध पर सुरक्षा के दृष्टिगत क्षेत्र में पिंजरा लगाया गया था। जहां शिकार के लालच में जैसे ही तेंदुआ पिंजरे में घुसा फौरन पिंजरे में कैद कर लिया गया और उसे सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है। -स्वास्थ्य व आयु: पशु चिकित्सकीय परीक्षण के अनुसार पकड़ी गई मादा तेंदुआ की उम्र लगभग 4 से 5 वर्ष है। 2. कतर्नियाघाट रेंज में तेंदुआ पिंजरे में कैद कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत ग्राम चहलवा के मंगलपुरवा में भी तेंदुए की आवाजाही और मवेशियों को क्षति पहुंचाने की घटनाओं के बाद ग्राम प्रधान व ग्रामीणों की मांग पर पिंजरा लगाया गया था। देर रात तेंदुए की लोकेशन ट्रैक करते हुए उसे पिंजरे में सुरक्षित कैद कर लिया गया। -स्वास्थ्य व आयु: चिकित्सकीय परीक्षण में पकड़ी गई मादा तेंदुआ की उम्र लगभग 4 वर्ष पाई गई है। पकड़े गए दोनों वन्यजीवों को विभाग के सुरक्षित संरक्षण (Safe Custody) में रखा गया है। शासन एवं उच्चाधिकारियों द्वारा निर्धारित मानकों व प्राप्त निर्देशों के अनुसार इनके पुनर्वास की अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। तेंदुआ-मानव संघर्ष से बचाव हेतु महत्वपूर्ण सतर्कता एवं सुझाव वन विभाग सभी क्षेत्रवासियों एवं ग्रामीणों से सावधान व सतर्क रहने की अपील करता है। तेंदुए या अन्य वन्यजीवों के साथ संघर्ष की संभावना को कम करने के लिए कृपया निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखें: 1. समूह में निकलें: सुबह और शाम के समय (खासकर अंधेरे में) अकेले बाहर न निकलें। खेतों या सुनसान रास्तों पर जाते समय हमेशा 2-3 लोगों के समूह में जाएँ और हाथ में लाठी रखें। 2. शौच के लिए बाहर न जाएँ: खुले में शौच के लिए न जाएँ, घरों में बने शौचालय का प्रयोग करें। 3. रोशनी एवं आवाज का प्रयोग करें: रात के समय खेतों या रास्तों में चलते समय टॉर्च का प्रयोग अवश्य करें तथा जोर-जोर से बातचीत करें, गाना गाएँ या लाठी जमीन पर पटकते हुए चलें ताकि वन्यजीव सतर्क होकर दूर हट जाएँ। 4. मवेशियों की सुरक्षा: अपने पशुओं व मवेशियों को बाड़े के अंदर सुरक्षित बांधकर रखें तथा बाड़े में पर्याप्त रोशनी का प्रबंध करें। 5. बच्चों का ध्यान रखें: छोटे बच्चों को अकेले घर से बाहर न जाने दें और उन पर लगातार नजर रखें। 6. झाड़ियों की सफाई: अपने घरों व पशुशालाओं के आसपास उगी झाड़ियों की नियमित सफाई करें ताकि वन्यजीवों को छिपने का स्थान न मिले। 7. अफवाहों व उत्तेजना से बचें: तेंदुए या किसी भी हिंसक वन्यजीव को देखने पर उसे घेरने, उकसाने या उस पर पथराव करने की कोशिश न करें। वन्यजीव को निकलने का रास्ता दें और तत्काल वन विभाग को सूचना दें। 8. तत्काल सूचना दें: यदि रिहायशी इलाकों के आसपास किसी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत नजदीकी वन कर्मी या रेंज कार्यालय को सूचित करें। वन विभाग की टीमें क्षेत्र में दिन-रात लगातार सघन गश्त कर रही हैं और स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए हैं। ये भी पढ़ें: पिंजरे में कैद हुआ दहशत फैलाने वाला तेंदुआ, वन विभाग की बड़ी कार्रवाई