नोएडा

Greater Noida Builder Scam: ग्रेटर नोएडा के 14 प्रोजेक्ट्स में 8,856 खरीदार फंसे, 315 करोड़ वसूली को बिल्डरों पर शिकंजा तय

Greater Noida Builder Scam: नियमों को ताक पर रखने वाले प्रमोटरों पर जारी होगी आरसी (RC), 8,856 खरीदारों की सांसें अटकीं। अब EOW जांच से खुलेगा पैसों की हेराफेरी का राज।

Reported by India Headlines and edited by Kashish Solanki

Greater Noida Builder Scam: ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने उन बिल्डरों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और खतरनाक कार्रवाई शुरू की है, जिन्होंने ‘अमिताभ कांत समिति’ की छूट और सरकार के अंतिम अवसर का भी लाभ नहीं लिया। प्राधिकरण ने ऐसे 14 प्रमुख परियोजनाओं के प्रमोटरों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उनसे 315.5 करोड़ रुपये वसूलने के लिए आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी करने का निर्णय लिया है। इसके लिए जिलाधिकारी को कड़े पत्र भेजा गया है, जिससे रियल एस्टेट बाजार में हलचल मच गई है। 

हजारों खरीदार 5 बड़े बकायेदार प्रोजेक्ट्स में फंसे

इस पूरे घोटाले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कुल बकाये का एक बड़ा हिस्सा यानी 199.3 करोड़ रुपये केवल 5 प्रमुख बकायेदारों पर धन है। इनमें ‘एसजेपी इंफ्राकॉन’ के प्रोजेक्ट में सबसे अधिक 2,406 खरीदार अपनी जीवन भर की कमाई फंसाकर बैठे हैं। इसके अलावा हेबे इंफ्रास्ट्रक्चर (1,236 खरीदार), निवास प्रमोटर्स (1,100 खरीदार), बीएस बिल्डटेक (819 खरीदार) और जेकेजी कंस्ट्रक्शन (704 खरीदार) के चलते कुल 8,856 लोगों के घरों का सपना अधर में लटका हुआ है।

अथॉरिटी ने जो 14 प्रमोटरों पर ध्यान केंद्रित किया है, उनमें एसडीएस इंफ्राटेक, इनटेलेक्ट प्रोजेक्ट, न्यूटेक लॉ पलासिया, अर्थकॉन कंस्ट्रक्शन, विहान डेवलपर्स, धन्य प्रमोटर्स, राजहंस इंफ्राटेक, आइडियल रियलटी और टाउनपार्क बिल्डिकॉन जैसे नाम शामिल हैं।

अब EOW करेगी पैसों की जांच, खरीदारों की गाढ़ी कमाई पर खुलेंगे राज।

जून 2024 में अमिताभ कांत समिति की सिफारिशें लागू होने के बाद लगभग 98 फंसे हुए प्रोजेक्ट्स में से कई ने 1,592 करोड़ रुपये जमा किए, जिससे 25 हजार से अधिक फ्लैट्स की रजिस्ट्री संभव हो सकी। हालाँकि, इन 14 बिल्डरों ने न तो धन दिया और न ही खरीदारों के प्रति कोई रुचि दिखायी।

अब प्राधिकरण इन डिफाल्टरों की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से जांच कराने की अंतिम तैयारी कर रहा है। इस जांच से यह सबसे बड़ा रहस्य सामने आएगा कि आखिर इन प्रमोटरों ने खरीदारों से लिए करोड़ों रुपये कहाँ और किस गुप्त स्थान पर डाइवर्ट (खर्च) कर दिए। यदि यह जांच आगे बढ़ती है, तो कई प्रमुख चेहरे और सफेदपोशों का बेनकाब होना संभव है।

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