Patient Harassment : नोएडा के जिला अस्पताल से एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य दावों की वास्तविकता उजागर कर दी है। अस्पताल में पेट में दर्द से परेशान एक मरीज को जब डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड की सलाह दी, तो वहां के स्टाफ ने उसे राहत पहुंचाने के बजाय चार महीने बाद की तारीख का एक पर्चा थमा दिया। इस आश्चर्यजनक तारीख को देखकर मरीज दंग रह गया और जब यह मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा, तो अस्पताल प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। 15 जून की ओपीडी, अगस्त का अपॉइंटमेंट सेक्टर-44 के छलेरा गांव के निवासी राजेश पिछले कुछ दिनों से पेट में तीव्र दर्द की गंभीर समस्या से ग्रस्त थे। उन्होंने 15 जून को जिला अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में एक डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने बीमारी का सही diagnosis करने के लिए तुरंत अल्ट्रासाउंड कराने का निर्देश दिया। जब राजेश अल्ट्रासाउंड विभाग में पहुंचे, जो अस्पताल की दूसरी मंजिल पर था, वहां के कर्मचारियों ने मरीज की स्थिति को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया और पर्चे पर सीधे पांच अगस्त की तारीख लिखकर उन्हें वापस भेज दिया। प्राइवेट सेंटरों की मजबूरी राजेश ने इस निष्क्रिय व्यवस्था का तीखा विरोध जताया, लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों ने उनकी कोई बात नहीं मानी। अंततः पीड़ित ने उच्च अधिकारियों को इस मामले की लिखित शिकायत की। मरीज का कहना था कि इतने समय तक बिना परीक्षण के इलाज कैसे संभव है और यदि स्वास्थ्य अधिक बिगड़ गया तो इसका उत्तरदायी कौन होगा? गैर इरादतन गरीब मरीजों को प्राइवेट सेंटरों में जाकर भारी राशि खर्च करनी पड़ती है। जैसे ही मामला मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) के पास पहुँचा, विभाग ने अपनी छवि को बनाए रखने के लिए तुरंत कदम उठाए। सीएमएस डॉ. अशोक ने कहा कि अस्पताल में मरीजों की अधिकता के चलते स्टाफ ने इतनी लंबी तारीख निर्धारित की होगी, लेकिन मरीज की गंभीर अवस्था का ध्यान रखना आवश्यक है। वर्तमान में, शिकायत मिलने के बाद मरीज राजेश को इमरजेंसी वार्ड में ले जाकर तुरंत अल्ट्रासाउंड कराया गया है। ये भी पढ़े : Noida Protest :1500 पन्नों की चार्जशीट, करावल नगर का सीक्रेट लैपटॉप, नोएडा श्रमिक हिंसा में बड़ा खुलासा।