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NEET री-एग्जाम में फर्जीवाड़ा! बिहार से 24 आरोपी गिरफ्तार, बायोमेट्रिक स्टाफ और मेडिकल छात्रों पर शिकंजा

NEET री-एग्जाम में फर्जीवाड़े का खुलासा, बिहार से 24 आरोपी गिरफ्तार; बायोमेट्रिक स्टाफ और मेडिकल छात्रों पर भी शिकंजा

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

NEET UG Re-Exam 2026: NEET UG री-एग्जाम के दौरान बिहार से परीक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक बड़ा खुलासा सामने आया है। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो कथित तौर पर असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा दिलाने का नेटवर्क चला रहा था। लखीसराय जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर की गई छापेमारी में कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें कई सॉल्वर और बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।

क्या है पूरा मामला

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के जरिए मेडिकल प्रवेश परीक्षा में फर्जी अभ्यर्थियों को बैठाने के लिए लाखों रुपये की डील की जाती थी। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कुछ मामलों में उम्मीदवारों से 30 लाख रुपये तक की रकम वसूली गई थी। इस खुलासे ने एक बार फिर देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे हुआ खुलासा

मामले का खुलासा तब हुआ जब एक युवक की गतिविधियां परीक्षा केंद्र पर संदिग्ध पाई गईं। जांच में पता चला कि वह कथित रूप से बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया से जुड़ा कर्मचारी बनकर केंद्र में पहुंचा था। पूछताछ के दौरान मिले सुरागों ने अधिकारियों को बड़े नेटवर्क तक पहुंचा दिया। इसके बाद अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर कार्रवाई कर कई अन्य आरोपियों को हिरासत में लिया गया।

मेडिकल और नर्सिंग से जुड़े लोग

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार लोगों में मेडिकल और नर्सिंग शिक्षा से जुड़े छात्र भी शामिल हैं। आरोप है कि कुछ छात्र दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे, जबकि कुछ लोग पूरे नेटवर्क को संचालित करने में भूमिका निभा रहे थे। इससे यह संकेत मिलता है कि गिरोह में पढ़े-लिखे और तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों की भी भागीदारी थी।

कहां तक फैले है मास्टरमाइंड के तार

जांच एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क का संचालन करने वाले कथित मास्टरमाइंड के तार पहले भी परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े मामलों में सामने आ चुके हैं। ऐसे में जांच अब पुराने मामलों और इस नए खुलासे के बीच संभावित संबंधों की भी पड़ताल कर रही है। पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं हो सकता। कई राज्यों में फैले संपर्कों और तकनीकी सहायता के जरिए यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय रहा हो, ऐसी आशंका जताई जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ और भी नाम सामने आने की संभावना है।

फिलहाल पुलिस, शिक्षा विभाग और अन्य एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। यह खुलासा एक बार फिर बताता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत करने की जरूरत है।

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