सेंसेक्स-निफ्टी में सुस्ती के पीछे क्या है असली वजह, जानिए आज निवेशकों के लिए सबसे बड़ा संकेत शेयर बाजार ने मंगलवार, 30 जून 2026 को सतर्क शुरुआत की। वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेत, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और आईटी सेक्टर में बिकवाली के दबाव के चलते निवेशकों ने शुरुआती कारोबार में सावधानी बरती। पिछले कारोबारी सत्र में तेज गिरावट के बाद बाजार में रिकवरी की उम्मीद थी, लेकिन शुरुआती घंटों में सेंसेक्स और निफ्टी किसी स्पष्ट दिशा में बढ़ते नजर नहीं आए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल निवेशक बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के साथ-साथ विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। निफ्टी और सेंसेक्स की चाल पर सबकी नजर मंगलवार सुबह निफ्टी 50 लगभग 23,900 से 24,000 अंकों के दायरे में कारोबार करता दिखाई दिया। इंडेक्स अपने प्रमुख सपोर्ट लेवल से ऊपर बना रहा, लेकिन खरीदारी का उत्साह कमजोर रहा। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार 24,100 से 24,200 अंक का स्तर फिलहाल सबसे मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। यदि निफ्टी इस स्तर को मजबूती से पार कर लेता है तो आगे 24,400 से 24,600 अंक तक तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर यदि इंडेक्स 23,800 के नीचे फिसलता है तो 23,600 से 23,500 तक गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सेंसेक्स की स्थिति भी लगभग इसी तरह रही। सोमवार को 372 अंकों की गिरावट के बाद यह 76,728.37 पर बंद हुआ था। मंगलवार को भी इसमें सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वहीं बैंक निफ्टी फिलहाल 58,000 के आसपास कंसोलिडेशन फेज में है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक बैंक निफ्टी 57,000 के ऊपर बना रहेगा, तब तक बैंकिंग सेक्टर की दीर्घकालिक मजबूती बरकरार मानी जाएगी। आईटी शेयरों की कमजोरी बनी सबसे बड़ी चिंता आज के कारोबार में सबसे अधिक दबाव आईटी सेक्टर पर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में आईटी शेयरों में करीब 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे प्रमुख सूचकांकों पर भी असर पड़ा। सोमवार को भी आईटी, ऑटो, बैंकिंग और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली थी। रिलायंस इंडस्ट्रीज, कोटक महिंद्रा बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एलएंडटी, एक्सिस बैंक, मारुति सुजुकी, एसबीआई, इंटरग्लोब एविएशन और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे बड़े शेयरों ने बाजार पर दबाव बनाया था। विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में जिन शेयरों में अच्छी तेजी आई थी, उनमें फिलहाल निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं। ब्रॉडर मार्केट भी दबाव में सिर्फ सेंसेक्स और निफ्टी ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी का असर दिखाई दिया। पिछले कारोबारी सत्र में निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में लगभग 0.37 प्रतिशत जबकि स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में करीब 0.62 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। इससे साफ संकेत मिलता है कि बाजार में फिलहाल व्यापक स्तर पर खरीदारी का माहौल नहीं है। निवेशकों की चिंता क्यों बढ़ रही है? इस समय भारतीय बाजार पर सबसे बड़ा प्रभाव पश्चिम एशिया में जारी तनाव का पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती गतिविधियां और अमेरिका-ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत निवेशकों की नजर में बनी हुई हैं। यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है, इसलिए तेल महंगा होने पर महंगाई और आयात बिल दोनों बढ़ सकते हैं। हालांकि फिलहाल कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली है, जिससे उपभोग और ब्याज दरों से जुड़े सेक्टरों को सीमित राहत मिली है। ग्लोबल बाजारों के मिले-जुले संकेत अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख भी निवेशकों के लिए असमंजस पैदा कर रहा है। अमेरिकी बाजारों में डॉव जोन्स और नैस्डैक ने मजबूत बढ़त दर्ज की, जबकि यूरोप के प्रमुख सूचकांक FTSE और DAX में हल्की कमजोरी देखने को मिली। दूसरी ओर एशियाई बाजारों में निक्केई और शंघाई कंपोजिट ने सकारात्मक शुरुआत की। इन मिश्रित संकेतों के कारण भारतीय बाजार किसी एक स्पष्ट दिशा में आगे नहीं बढ़ पा रहा है। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में उम्मीद कायम हाल के सप्ताहों में बैंकिंग शेयरों का प्रदर्शन मजबूत रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा जमा के बदले ऋण सुविधा से जुड़े फैसलों का सकारात्मक असर प्रमुख बैंकों पर देखने को मिला। एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे शेयरों ने पहले के कारोबारी सत्रों में अच्छी मजबूती दिखाई थी। ऑटो सेक्टर में भी महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी और इंटरग्लोब एविएशन जैसे शेयरों ने हाल में अच्छा प्रदर्शन किया। हालांकि मंगलवार को इन शेयरों में सीमित मुनाफावसूली देखने को मिली। तकनीकी विश्लेषकों की क्या है राय? मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा गिरावट किसी बड़े करेक्शन की शुरुआत नहीं बल्कि एक सामान्य कंसोलिडेशन का हिस्सा है। कई ब्रोकरेज हाउस का कहना है कि यदि निफ्टी 23,750–23,800 के आसपास आता है तो यह निवेशकों के लिए खरीदारी का बेहतर अवसर हो सकता है। उनका अनुमान है कि आने वाले सप्ताहों में बाजार 24,500 से 24,600 के स्तर तक पहुंच सकता है। इसी तरह बैंक निफ्टी में 57,000 के आसपास का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है और यहां से 59,200 तक की संभावित तेजी की उम्मीद जताई जा रही है। आगे बाजार की दिशा क्या होगी? विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल बाजार पूरी तरह "वेट एंड वॉच" मोड में है। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों (FII) की खरीद-बिक्री और वैश्विक बाजारों के संकेत भारतीय शेयर बाजार की अगली चाल तय करेंगे। यदि वैश्विक परिस्थितियां सामान्य रहती हैं तो बाजार में दोबारा खरीदारी लौट सकती है। वहीं किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर भारतीय बाजार पर तुरंत देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए सलाह विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचना चाहिए। मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर नजर रखते हुए चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाना अधिक सुरक्षित माना जा रहा है। Note: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे निवेश सलाह न माना जाए। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें।