NDA Mangal Milan: संसद सत्र के बीच मंगलवार को एनडीए सांसदों की ‘मंगल मिलन’ बैठक में सत्ता पक्ष का राजनीतिक एजेंडा साफ नजर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन समेत एनडीए के कई सांसदों ने बैठक के दौरान तिरंगा लहराया और ‘वंदे मातरम’ के नारों के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। संसद पुस्तकालय में हुई इस बैठक के बाद एनडीए सांसदों ने झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर संसद परिसर में प्रदर्शन भी किया। सांसदों के हाथों में पोस्टर थे, जिनके जरिए झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया। झारखंड मुद्दे पर सरकार का विपक्ष पर हमला एनडीए सांसदों की ओर से कहा गया कि सरकार छात्रों के प्रदर्शन समेत महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहा है। सांसदों के पोस्टरों में झारखंड सरकार पर छात्रों के साथ कथित अत्याचार का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए गए। सत्ता पक्ष की रणनीति अब संसद के भीतर भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की है। माना जा रहा है कि एनडीए सांसद इस मामले में सरकार का पक्ष मजबूती से रखने की कोशिश करेंगे। पिछली बैठक में विकास और रोजगार पर हुई थी चर्चा पिछले सप्ताह हुई ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद भाजपा सांसदों ने सरकार की उपलब्धियों को लेकर अपनी बात रखी थी। इसमें रोजगार, आर्थिक विकास, खेल और गरीबी कम करने जैसे मुद्दों पर चर्चा का उल्लेख किया गया था। भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने दावा किया था कि भारत आर्थिक और विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने रोजगार के मोर्चे पर सुधार और बेरोजगारी में कमी का दावा करते हुए कहा था कि बड़ी संख्या में लोग गरीबी से बाहर आए हैं। वहीं, सांसद मनोज तिवारी ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया था। उनके मुताबिक, बैठक में सांसदों ने यह सुनिश्चित करने पर सहमति जताई कि सदन में उनकी उपस्थिति लगातार बनी रहे, ताकि महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित कराने की प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है ‘मंगल मिलन’ बैठक? ‘मंगल मिलन’ एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक रणनीतिक बैठक का नया नाम है। इसका उद्देश्य गठबंधन के सांसदों के बीच बेहतर समन्वय बनाना और संसद की कार्यवाही को लेकर साझा रणनीति तैयार करना है। बैठक में सदन के भीतर उठाए जाने वाले मुद्दों, सांसदों की भूमिका और अलग-अलग सहयोगी दलों के बीच तालमेल पर चर्चा होती है। शिवसेना, एलजेपी, टीडीपी, जेडीयू समेत एनडीए के सहयोगी दलों के नेता भी इसमें शामिल होते हैं। संसद सत्र के दौरान यह बैठक सत्ता पक्ष के लिए रणनीति तय करने का अहम मंच बन गई है। ऐसे में झारखंड के छात्र आंदोलन को लेकर मंगलवार के प्रदर्शन ने इस बैठक को और ज्यादा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया। ये भी पढ़ें: नरपत डुकिया संभालेंगे राम मंदिर के संचालन-प्रबंधन की कमान, अब CEO की नियुक्ति पर नजर