Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने परिवारवाद के मुद्दे पर शनिवार को ऐसा बयान दिया, जिसने यूपी की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिवारवाद पर सवाल पूछे जाने पर अखिलेश ने कहा कि इसके कुछ राजनीतिक फायदे भी होते हैं। उन्होंने दावा किया कि एक समय समाजवादी पार्टी के कई सांसद एक ही परिवार से थे और यही वजह बनी कि पार्टी टूटने से बच गई। परिवार ने सपा को संभाला अखिलेश यादव ने कहा कि कई राजनीतिक दल अलग-अलग कारणों से टूट गए, लेकिन सपा के साथ ऐसा नहीं हुआ। उनके मुताबिक, पार्टी के पांच सांसद एक ही परिवार से थे, जबकि कुछ मुस्लिम सांसद और पुराने समाजवादी नेता भी मजबूती से साथ खड़े रहे। उन्होंने इसी सामाजिक और राजनीतिक समीकरण को पार्टी के एकजुट रहने की वजह बताया। सरकार पर लगाए गंभीर आरोप सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि आज सच बोलने पर भी पाबंदियां लगाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने रखना चाहते हैं, उन्हें भी रोकने की कोशिश की जाती है। उन्होंने युवाओं के रोजगार और तकनीकी बदलाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इंटरनेट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों के दौर में देश को उसी दिशा में आगे बढ़ना होगा। किसानों के लिए भी AI के इस्तेमाल पर काम करने की जरूरत है। PDA को लेकर फिर साफ किया रुख अखिलेश ने PDA को लेकर कहा कि समाजवादी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि PDA का अर्थ सिर्फ राजनीतिक समीकरण नहीं, बल्कि प्रेम, दया और अपनापन भी है। उनके मुताबिक, समाज के अलग-अलग वर्गों को जोड़ने से पार्टी और मजबूत होगी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा PDA की बढ़ती स्वीकार्यता से चिंतित है, इसलिए इसकी अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही हैं। ‘चवन्नी’ विवाद पर क्या बोले अखिलेश? जयंत चौधरी को लेकर दिए गए कथित ‘चवन्नी’ बयान पर अखिलेश ने कहा कि सच बोलना भी अब गलत माना जा रहा है। उन्होंने गठबंधन को लेकर स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी साथ निभाने में विश्वास रखती है और मौजूदा गठबंधन बना रहेगा। अखिलेश के इस बयान के बाद परिवारवाद, PDA और गठबंधन की राजनीति को लेकर यूपी में सियासी बहस और तेज होने के आसार हैं। ये भी पढ़ें: जाट समाज से मांगें माफी… ‘चवन्नी’ बयान पर मायावती ने अखिलेश को घेरा