रिपोर्ट : अजय शर्मा - बहराइच बहराइच। भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी की जनपद स्तरीय कार्यकारिणी के हाल में हुए चुनाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। संगठन के कई आजीवन सदस्यों ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि चुनाव की जानकारी कई आजीवन सदस्यों को नहीं दी गई। उनका कहना है कि सूचना नहीं मिलने के कारण लंबे समय से संगठन से जुड़े सदस्य चुनाव प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके। आजीवन सदस्यों ने चुनाव में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि चुनाव के दौरान सदस्यता सूची उपलब्ध कराने की मांग की गई, लेकिन सूची सार्वजनिक नहीं की गई। इसके चलते उन्हें यह पता नहीं चल सका कि चुनाव में कौन-कौन सदस्य मतदान के लिए पात्र थे। ज्ञापन में रेड क्रॉस सोसाइटी के नियमों का हवाला देते हुए चुनाव प्रक्रिया की वैधानिकता की जांच कराने की मांग की गई है। सदस्यों ने यह भी सवाल उठाया कि चुनाव जिलाधिकारी की मौजूदगी में हुआ या उनके द्वारा नामित अधिकारी की देखरेख में कराया गया। मामला सिर्फ चुनाव प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। इस मामले में शिकायतकर्ताओं ने कथित निर्वाचित सदस्यों की सूची पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि सूची में कुछ ऐसे नाम शामिल हैं, जिनकी चुनाव के दौरान मौके पर मौजूदगी और नामांकन प्रक्रिया में भागीदारी को लेकर संदेह है। शिकायतकर्ताओं ने भगवानदीन मिश्रा के नाम का भी उल्लेख करते हुए उनकी चुनावी प्रक्रिया में मौजूदगी की जांच की मांग की है। इसके साथ ही नामांकन पत्र, उपस्थिति रजिस्टर, सदस्यता सूची और चुनाव से जुड़े अन्य दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की गई है। आजीवन सदस्यों का कहना है कि उन्होंने चुनाव के दौरान अपनी आपत्तियां दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उनकी बात पर उचित कार्रवाई नहीं हुई। अब उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जांच पूरी होने तक विवादित चुनाव के आधार पर नई कार्यकारिणी के गठन पर रोक लगाने की मांग की है। ज्ञापन देने वाले सदस्यों ने प्रशासन को एक सप्ताह का समय दिया है। उनका कहना है कि यदि इस अवधि में चुनाव को निरस्त करने या निष्पक्ष जांच शुरू करने की दिशा में कार्रवाई नहीं हुई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे। सदस्यों ने रेड क्रॉस सोसाइटी के स्टेट प्रेसिडेंट और राज्यपाल से भी मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि चुनाव को निरस्त कर नियमों के अनुसार दोबारा चुनाव कराया जाना चाहिए। अब पूरे मामले में जिला प्रशासन की जांच और चुनाव से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल अहम होगी। आरोप सही हैं या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। ये भी पढ़ें : 250 करोड़ की साइबर ठगी का ‘बैंक कनेक्शन’ आया सामने, रिलेशन मैनेजर गिरफ्तार; बोगस खातों से होता था करोड़ों का खेल