KANPUR FLOOD : लगातार हो रही बारिश और पांडु नदी के बढ़ते जलस्तर ने बर्रा-8 के वरुण विहार क्षेत्र की कच्ची बस्ती में रहने वाले परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नदी का पानी बस्ती तक पहुंचने के बाद कई घर और झोपड़ियां जलभराव की चपेट में आ गईं। हालात बिगड़ने पर कई परिवारों को अपना घर छोड़कर बच्चों और जरूरी सामान के साथ सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। बस्ती की गलियों में पानी जमा है और कई घरों के बाहर ताले लटक रहे हैं। रात में बढ़ा पानी, बच्चों को लेकर घरों से निकले परिवार स्थानीय लोगों के अनुसार बुधवार रात पांडु नदी का पानी तेजी से बढ़ा। कुछ ही देर में पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया। रात के अंधेरे में परिवारों ने मोबाइल की रोशनी के सहारे बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित बाहर निकाला। अचानक आई इस स्थिति में लोगों को घरेलू सामान समेटने का भी पर्याप्त समय नहीं मिला, कई परिवार ऊंचे स्थानों पर चले गए, जबकि कुछ लोगों ने रिश्तेदारों, परिचितों और किराये के कमरों में अस्थायी ठिकाना बनाया है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि पानी कम होने तक उनके लिए घरों में वापस लौटना संभव नहीं है। घरों में पानी, गृहस्थी प्रभावित, रास्ते भी जलमग्न बस्ती में जलभराव के कारण घरों के अंदर रखा सामान प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर गलियों और आने-जाने वाले रास्तों में भी पानी भर गया है। इससे लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका असर पड़ा है और जलभराव के कारण कई बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि जलभराव की स्थिति बनने के बाद भी उन्हें पर्याप्त प्रशासनिक राहत नहीं मिली। प्रभावित परिवारों ने राहत सामग्री, सुरक्षित स्थान, जलनिकासी और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। डूबे घरों पर लटके ताले, खाली हुईं गलियां पानी बढ़ने के बाद कई परिवार अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। पीछे रह गए घरों पर ताले लटक रहे हैं। जिन गलियों में सामान्य दिनों में लोगों की आवाजाही रहती थी, वहां अब पानी और सन्नाटा दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या केवल इस बार की नहीं है। मानसून के दौरान पांडु नदी और आसपास के जलस्रोतों का जलस्तर बढ़ने पर हर साल कच्ची बस्तियों में जलभराव की स्थिति बनती है। लोगों को कई बार अपना घर खाली करना पड़ता है, लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। रफाका नाले में बैकफ्लो का खतरा पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ रफाका नाले में बैकफ्लो की आशंका भी बढ़ गई है। यदि नदी का पानी नाले में पहुंचता है तो आसपास के क्षेत्रों में जलभराव और गंभीर हो सकता है। रावतपुर, विजयनगर, दादानगर और बर्रा-7 जैसे इलाकों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से स्थानीय लोगों में चिंता बनी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि बारिश और नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो मौजूदा जलभराव और अधिक इलाकों तक फैल सकता है। गंगा का जलस्तर भी बढ़ा, प्रशासन अलर्ट उधर, गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और सिंचाई विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। गंगा बैराज के अपस्ट्रीम में जलस्तर 113.620 मीटर और डाउनस्ट्रीम में 113.470 मीटर दर्ज किया गया। अपस्ट्रीम में चेतावनी बिंदु 114 मीटर और खतरे का निशान 115 मीटर है। बैराज से 2,99,861 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी है। शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर 112.24 मीटर दर्ज किया गया है। यहां चेतावनी बिंदु 113 मीटर और खतरे का निशान 114 मीटर है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ा दी है। कटरी क्षेत्र के 176 गांवों में अलर्ट जारी किया गया है। राहत के साथ स्थायी समाधान की मांग बर्रा-8 की कच्ची बस्ती के प्रभावित परिवारों का कहना है कि फिलहाल उन्हें तत्काल राहत और सुरक्षित ठिकाने की जरूरत है। लोगों ने प्रशासन से जलभराव वाले घरों और गलियों से पानी निकालने, राहत सामग्री उपलब्ध कराने और प्रभावित परिवारों की मदद करने की मांग की है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों ने हर साल मानसून में सामने आने वाली जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जब तक जलनिकासी और नदी के बढ़ते पानी से बचाव के लिए ठोस व्यवस्था नहीं होगी, तब तक हर बारिश में परिवारों के सामने घर छोड़ने का संकट बना रहेगा। ये भी पढ़ें : नोएडा पुलिस का बड़ा एक्शन! अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह पकड़ा, दिल्ली-NCR से चंडीगढ़ तक फैला था नेटवर्क