उत्तर प्रदेशबाँदा

100 रुपये के स्टांप पर 333 करोड़ का सौदा! बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे टोल कॉन्ट्रैक्ट में 13.34 करोड़ की स्टांप चोरी का खुलासा

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के 333.65 करोड़ रुपये के टोल अनुबंध में 13.34 करोड़ रुपये की कथित स्टांप चोरी का खुलासा हुआ है। जांच में अनुबंध पर सिर्फ 100 रुपये का स्टांप पेपर लगाए जाने की बात सामने आई है।

Banda News: उत्तर प्रदेश में राजस्व विभाग की जांच के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी अनुबंधों की निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के टोल संचालन से जुड़े 333.65 करोड़ रुपये के एक बड़े अनुबंध में करोड़ों रुपये के स्टांप शुल्क की कथित चोरी पकड़ी गई है। जांच में सामने आया कि जिस अनुबंध पर नियमों के अनुसार 13.34 करोड़ रुपये से अधिक का स्टांप शुल्क देय था, उस पर केवल 100 रुपये का स्टांप पेपर इस्तेमाल किया गया।

करोड़ों का समझौता

स्टांप एवं निबंधन विभाग की जांच के बाद मामले को गंभीर मानते हुए सहायक महानिरीक्षक (एआईजी) निबंधन की अदालत में वाद दर्ज कराया गया है। अधिकारियों के अनुसार यह मामला बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली के अधिकार से जुड़ा है, जिसकी कुल अनुबंधित राशि 333 करोड़ 65 लाख रुपये से अधिक है। जांच में पता चला कि उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) और एक निजी कंसोर्टियम के बीच 10 अक्टूबर 2024 को यह अनुबंध किया गया था। समझौते की अवधि दो वर्ष निर्धारित की गई थी। अनुबंध के अनुसार पहले वर्ष कंपनी को लगभग 158.88 करोड़ रुपये तथा दूसरे वर्ष 10 प्रतिशत वृद्धि के साथ करीब 174.77 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था। दोनों वर्षों की राशि मिलाकर अनुबंध का कुल मूल्य 333.65 करोड़ रुपये से अधिक बैठता है।

स्टांप घोटाले का खुलासा

चित्रकूटधाम मंडल के उप महानिरीक्षक निबंधन रईस अहमद खां ने बताया कि भारतीय स्टांप अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार इस तरह के अनुबंध पर चार प्रतिशत स्टांप शुल्क देय होता है। गणना के आधार पर यह राशि 13 करोड़ 34 लाख 62 हजार 840 रुपये बनती है। लेकिन दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि अनुबंध केवल 100 रुपये के स्टांप पेपर पर निष्पादित किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल सेवा संचालन का समझौता नहीं था, बल्कि संबंधित कंपनी को चित्रकूट से इटावा तक पूरे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजाओं से राजस्व संग्रह का अधिकार भी दिया गया था। इसी कारण इसे राजस्व हस्तांतरण से जुड़ा अनुबंध माना गया और उस पर निर्धारित स्टांप शुल्क लागू हुआ।

नोटिस और कार्रवाई

विभागीय अधिकारियों के अनुसार बड़े टोल अनुबंधों की नियमित जांच के निर्देश पहले से दिए गए थे। इसी क्रम में यूपीडा से आवश्यक दस्तावेज मंगवाकर उनकी जांच की गई, जिसके बाद यह मामला सामने आया। अब संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर नियमानुसार स्टांप शुल्क की वसूली और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।विभाग ने संकेत दिए हैं कि नगर निकायों, विकास प्राधिकरणों, मंडी परिषदों और अन्य सरकारी-अर्द्धसरकारी संस्थाओं के अनुबंधों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जहां भी राजस्व हानि या स्टांप अधिनियम के उल्लंघन के मामले सामने आएंगे, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जुड़ा यह मामला प्रदेश में स्टांप शुल्क अनियमितताओं के सबसे बड़े मामलों में से एक माना जा रहा है और इसकी जांच पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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