Construction Site Accident : उत्तर प्रदेश की महोबा की पत्थर मंडियों में गरीब मजदूर लगातार मर रहे हैं क्योंकि सुरक्षा नियमों की अनदेखी और लापरवाही रुकने का नाम नहीं ले रही। नया मामला कबरई थाना क्षेत्र के डहर्रा पहाड़ स्थित एक पत्थर खदान का है. जहा रविवार शाम को पहाड़ से नीचे गिरकर एक कर्मचारी की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उसका दूसरा साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। यह दुर्घटना एक बार फिर प्रशासनिक दावों और खदान संचालकों की लापरवाही की पोल खोलती है। खदान संचालकों पर बिना सुरक्षा उपकरण काम कराने का आरोप डहर्रा खदान में कबरई निवासी छेदीलाल (49 वर्ष) अपने साथी मजदूर दुर्गेश (55 वर्ष) के साथ काम कर रहा था। उस समय, दोनों पैर फिसलने या संतुलन खोने से ऊंचाई से सीधे नीचे गिरे। परिजनों का आरोप है कि मजदूरों को पट्टा धारक और खदान संचालकों द्वारा कोई सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए। बेहद खतरनाक स्थान पर बिना सुरक्षा के काम कराए जाने से हुआ यह बड़ा हादसा, जिसमें छेदीलाल की जान चली गई। अमानवीयता की हद: शव को ट्रैक्टर-ट्रॉली में लेकर पहुंचे अस्पताल हादसे के बाद खदान कर्मचारी और पट्टा धारक कर्मचारी भयभीत हो गए। मृत छेदीलाल और घायल दुर्गेश को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया , जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद छेदीलाल को मृत घोषित किया। इस दौरान, सिस्टम का एक बहुत ही अमानवीय और संवेदनशील चित्र भी सामने आया मृत शरीर को खदान से जिला अस्पताल तक ट्रैक्टर-ट्रॉली में लाया गया। मृतकों और घायलों के लिए एक एम्बुलेंस तक की व्यवस्था करने में मौके पर मौजूद जिम्मेदार प्रशासन असफल रहा। मजदूरों के लिए कब्रगाह बनती जा रही हैं कबरई की खदानें ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, अब कबरई की खदानों में ऐसे जानलेवा हादसे होते हैं। गरीब कर्मचारियों के लिए महोबा की पत्थर की खदानें कब्रगाह बन गई हैं। यद्यपि हर बड़ी दुर्घटना के बाद जिला प्रशासन और संबंधित विभाग ने व्यापक जांचों और कठोर कार्रवाई की घोषणा की है, लेकिन वास्तव में स्थिति यथावत है। बिना सुरक्षा बेल्ट और हेलमेट के कर्मचारियों को आज भी मौत के कुएं में डाला जा रहा है, हालांकि सुरक्षा नियमों और नियमों का पालन नहीं किया गया है। फिर भी, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। ये भी पढ़े : ई-एमएम-11 के बिना खनिज ढुलाई नहीं, DM ने जारी किए सख्त आदेश