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ईरान ने ट्रंप को दिया बड़ा झटका! 2029 तक नहीं खुलेगा होर्मुज, बातचीत से इनकार

ईरान ने ट्रंप प्रशासन से 2029 तक सीधी बातचीत से इनकार के संकेत दिए हैं। तेहरान ने होर्मुज खोलने के बदले मुआवजा, संपत्तियों की रिहाई और अमेरिकी सेना हटाने की मांग रखी।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Iran-US Tension: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। तेहरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के साथ तत्काल बातचीत की संभावना को खारिज करते हुए संकेत दिया है कि वह उनके मौजूदा कार्यकाल के खत्म होने तक इंतजार करने की रणनीति अपना सकता है। ईरानी पक्ष से जुड़े एक सलाहकार ने कहा है कि ट्रंप के साथ समझौते की उम्मीद नहीं है और मौजूदा रणनीति को जनवरी 2029 तक जारी रखा जा सकता है। ([Benzinga][1])

2029 तक इंतजार की बात

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ के सलाहकार माजिद शाकेरी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तेहरान का रुख सामने रखा। उनके मुताबिक, ईरान का लक्ष्य तत्काल समझौते के बजाय रणनीतिक धैर्य बनाए रखना है। उनका कहना है कि ट्रंप प्रशासन के साथ सार्वजनिक तौर पर बातचीत की पुष्टि करना फिलहाल ईरान के हित में नहीं होगा। ईरान का यह रुख ऐसे समय आया है जब अमेरिका की ओर से तनाव कम करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए दबाव बढ़ाया जा रहा है।

ईरान की शर्तें क्या हैं?

तेहरान ने अमेरिका के साथ आगे बातचीत के लिए कई मांगें रखी हैं। इनमें युद्ध से हुए नुकसान के लिए करीब 300 अरब डॉलर के मुआवजे, जब्त या फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों की रिहाई और अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी जैसी शर्तें शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की युद्ध क्षतिपूर्ति की मांग को खारिज करने का संकेत दिया है। ऐसे में दोनों देशों के बीच समझौते की राह फिलहाल मुश्किल नजर आ रही है।

सीधी बातचीत नहीं

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के मुताबिक, दोनों देशों के बीच फिलहाल प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हो रही है। हालांकि, मध्यस्थ देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। ईरान का कहना है कि औपचारिक वार्ता के लिए पहले अमेरिका को उसकी प्रमुख चिंताओं और मांगों पर ठोस कदम उठाने होंगे।

होर्मुज पर भी तेहरान का सख्त रुख

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी अपना रुख नरम नहीं किया है। तेहरान का कहना है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलने का फैसला अमेरिकी कदमों और बातचीत के नतीजे से जुड़ा होगा। हालिया रिपोर्टों में भी कहा गया है कि होर्मुज के भविष्य को लेकर गतिरोध बना हुआ है। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। इसके आसपास जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। मंगलवार को भी होर्मुज को लेकर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती देखी गई।

ऐसे में ईरान का 2029 तक इंतजार करने का संकेत अमेरिका के लिए नई कूटनीतिक चुनौती बन गया है। अब नजर इस बात पर है कि ट्रंप प्रशासन तेहरान के इस सख्त रुख का जवाब किस रणनीति से देता है।

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