US Iran Talks: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई अहम कूटनीतिक बातचीत के बाद दुनिया की नजरें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या वर्षों से चला आ रहा तनाव अब कम होने जा रहा है। बातचीत के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मीडिया को संबोधित करते हुए कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं और संकेत दिए कि दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है। क्या रहा चर्चा का सार वेंस के अनुसार, वार्ता का माहौल रचनात्मक रहा और चर्चा देर रात तक चली। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने ऐसे विषयों पर बातचीत की है, जिनका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं बल्कि पूरे वैश्विक समुदाय पर पड़ सकता है। सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रहा, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। वेंस ने बताया कि इस जलमार्ग को सुरक्षित और निर्बाध बनाए रखने के लिए एक नई व्यवस्था पर सहमति बनी है। इससे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। बातचीत में प्रगति के संकेत परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी बातचीत में प्रगति के संकेत मिले हैं। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण व्यवस्था के तहत अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की निगरानी पर चर्चा के लिए तैयार हुआ है। हालांकि, इस दिशा में अभी कई तकनीकी और राजनयिक प्रक्रियाएं पूरी की जानी बाकी हैं। वेंस ने स्पष्ट किया कि वार्ता का यह चरण केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में विशेषज्ञ स्तर पर बातचीत जारी रहेगी। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, विशेष रूप से लेबनान और इजरायल से जुड़े मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा रहे। अमेरिका ने क्षेत्र में तनाव कम करने और संभावित टकराव को रोकने के लिए एक समन्वय तंत्र तैयार करने की बात कही है। वेंस ने कहा कि क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा अमेरिका की प्राथमिकताओं में शामिल है और इसके लिए सभी पक्षों के साथ संवाद जारी रहेगा। आम नागरिकों के हितों को प्राथमिकता आर्थिक मोर्चे पर भी कुछ सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। ईरान की जमी हुई संपत्तियों और संभावित आर्थिक गतिविधियों को लेकर चर्चा हुई। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यदि भविष्य में कोई आर्थिक राहत दी जाती है तो उसका उद्देश्य आम नागरिकों के हितों को प्राथमिकता देना होगा। साथ ही, व्यापारिक गतिविधियों के बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों और कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिल सकता है। हालांकि अभी किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन वार्ता के बाद आए बयानों ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच संवाद का नया दौर शुरू हो चुका है। आने वाले सप्ताह इस बात को तय करेंगे कि यह बातचीत स्थायी समाधान की दिशा में कितनी आगे बढ़ पाती है। ये भी पढ़ें: 111 दिनों के तनाव के बाद बड़ा मोड़! ट्रंप-पेजेशकियन समझौते ने पश्चिम एशिया में शांति की जगाई उम्मीद