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ट्विशा शर्मा केस में नया ट्विस्ट, 10 दिन बाद गिरफ्त में पति समर्थ, VIP ट्रीटमेंट के आरोपों से मचा बवाल

ट्विशा शर्मा मौत मामले में बड़ा मोड़ सामने आया है। 10 दिनों से फरार चल रहे पति समर्थ सिंह को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के बाद अब कोर्ट परिसर में कथित VIP ट्रीटमेंट मिलने के आरोपों ने पूरे मामले को और ज्यादा विवादित बना दिया है।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Twisha Sharma Death Update || Twisha Sharma Husband || Samarth Singh Surrender || Samarth Singh VIP Treatment:  मध्य प्रदेश के भोपाल की चर्चित मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले में शुक्रवार शाम उस वक्त बड़ा मोड़ आ गया, जब करीब 10 दिनों से फरार चल रहे मुख्य आरोपी और ट्विशा के पति समर्थ सिंह को जबलपुर पुलिस ने हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के बाद समर्थ को भोपाल पुलिस के हवाले किया गया और देर रात करीब 2 बजे उसे भोपाल लाया गया। फिलहाल आरोपी को कटारा हिल्स थाने में रखा गया है, जहां उससे पूछताछ जारी है। शनिवार सुबह उसे कोर्ट में पेश किए जाने की तैयारी है।

लेकिन समर्थ की गिरफ्तारी से ज्यादा चर्चा अब उस कथित VIP ट्रीटमेंट की हो रही है, जिसे लेकर न्यायिक व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ट्विशा शर्मा के परिवार ने आरोप लगाया है कि प्रभावशाली रसूख के चलते आरोपी को लगातार संरक्षण मिलता रहा और गिरफ्तारी से पहले भी उसे अदालत परिसर में विशेष सुविधाएं दी गईं।

बंद कमरे में बैठा था आरोपी

ट्विशा शर्मा के पिता की ओर से पैरवी कर रहे वकील अनुराग श्रीवास्तव ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक, मीडिया के सामने आने से पहले समर्थ सिंह जबलपुर जिला अदालत के कोर्ट रूम नंबर 32 में मौजूद था, जो जिला एवं सत्र न्यायाधीश का कोर्ट रूम बताया जा रहा है।वकील का दावा है कि उस दौरान कमरे के दरवाजे बंद रखे गए थे और आरोपी को वहां बैठने की अनुमति दी गई। अनुराग श्रीवास्तव ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर किस अधिकार के तहत एक वांछित आरोपी को जिला जज के चैंबर में बैठने दिया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने दरवाजा खुलवाने की मांग की, तब समर्थ वहां से निकलकर बार एसोसिएशन के चैंबर में जाकर बैठ गया। वकील के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि आरोपी को किस तरह संरक्षण दिया जा रहा था।

 खुलेआम घूम रहा था समर्थ

मामला इसलिए और गंभीर माना जा रहा है क्योंकि समर्थ सिंह के खिलाफ पहले ही लुकआउट नोटिस जारी हो चुका था। इतना ही नहीं, उसकी गिरफ्तारी पर ₹30 हजार का इनाम भी घोषित किया गया था। इसके बावजूद ट्विशा के परिवार का आरोप है कि आरोपी खुले तौर पर घूमता रहा और पुलिस ने उसके खिलाफ वैसी सख्ती नहीं दिखाई जैसी किसी फरार आरोपी के साथ की जानी चाहिए।

कोर्ट परिसर में चला हाई-वोल्टेज ड्रामा

शुक्रवार शाम जब समर्थ सिंह कथित तौर पर सरेंडर करने जबलपुर जिला अदालत पहुंचा, तो वहां करीब एक घंटे तक हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। समर्थ फेस मास्क लगाकर कोर्ट पहुंचा और मीडिया के सवालों पर पूरी तरह चुप्पी साधे रहा। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, जब पत्रकारों ने उससे सवाल पूछने की कोशिश की तो उसके साथ मौजूद कुछ लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान अदालत परिसर में अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया।

अग्रिम जमानत याचिका वापस

समर्थ के वकील सौरभ सुंदर ने मीडिया से कहा कि उनके मुवक्किल ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली है और अब वह सरेंडर करने आए हैं। उन्होंने कहा कि समर्थ अदालत में आत्मसमर्पण करेगा और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के सामने याचिका दायर की जा रही है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही जबलपुर पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। इसके बाद भोपाल पुलिस आरोपी को अपने साथ ले गई।

रिटायर्ड जज मां पर भी सवाल

इस पूरे मामले में समर्थ सिंह की मां और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह का नाम भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। ट्विशा शर्मा का परिवार शुरू से आरोप लगाता रहा है कि आरोपी पक्ष प्रभावशाली है और इसी कारण जांच की दिशा और रफ्तार प्रभावित हुई। बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश सरकार ने भी गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया है और कोर्ट में इसे खारिज कराने की मांग रखी है।

शव सौंपने की मांग भी कोर्ट ने ठुकराई

इसी बीच कोर्ट में एक और अहम मोड़ तब आया, जब समर्थ सिंह की कानूनी टीम ने हिंदू रीति-रिवाजों का हवाला देते हुए ट्विशा शर्मा का शव उसके पति को सौंपे जाने की मांग की। हालांकि कोर्ट ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया।

बार काउंसिल ने निलंबित किया लाइसेंस

मामले में बढ़ते विवाद के बीच बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी बड़ा कदम उठाया है। समर्थ सिंह का वकालत लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान वह अपने नाम के आगे “एडवोकेट” शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आरोपी को वास्तव में सिस्टम के भीतर से संरक्षण मिल रहा था, या फिर यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा था। फिलहाल समर्थ सिंह की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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