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‘जनता की जेब पर नया वार?’ UPI पर चार्ज को लेकर खरगे का बड़ा हमला

खरगे ने UPI पर संभावित शुल्क को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई से परेशान जनता पर डिजिटल भुगतान का अतिरिक्त बोझ डालने की तैयारी है।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Mallikarjun Kharge: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने UPI लेनदेन पर संभावित शुल्क को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। खरगे ने आरोप लगाया कि महंगाई से परेशान आम लोगों को राहत देने के बजाय सरकार उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने की तैयारी कर रही है। खरगे ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि सरकार की ‘लूट’ अब UPI तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि पहले 2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन को शुल्क मुक्त रखने की बात सामने आई थी, लेकिन अब बड़े डिजिटल भुगतान पर संभावित चार्ज को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

महंगाई के बीच नया बोझ?

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बढ़ती महंगाई के कारण आम आदमी की आर्थिक स्थिति पहले ही दबाव में है। उन्होंने थोक महंगाई का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि डिजिटल पेमेंट पर किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया तो इसका सीधा असर उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है। खरगे ने नोटबंदी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि करीब एक दशक पहले नोटबंदी के दौरान सरकार ने डिजिटल पेमेंट और कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने की बात कही थी। अब UPI पर संभावित शुल्क की चर्चा को उन्होंने उसी नीति के उलट कदम बताया।

5 हजार के भुगतान पर 25 रुपये?

खरगे ने अपने पोस्ट में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि क्या 5,000 रुपये के UPI लेनदेन पर 25 रुपये और 10,000 रुपये के लेनदेन पर 50 रुपये तक शुल्क वसूले जाने की तैयारी है। उन्होंने वित्त मंत्री के उस कथित बयान का भी जिक्र किया, जिसमें UPI पर टैक्स या चार्ज नहीं लगाए जाने की बात कही गई थी। खरगे ने केंद्र से स्पष्ट जवाब मांगा कि आखिर बड़े डिजिटल लेनदेन पर शुल्क को लेकर चल रही चर्चाओं की वास्तविकता क्या है।

MDR पर भी सरकार को घेरा

खरगे ने MDR यानी Merchant Discount Rate का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अगर कारोबारियों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ बढ़ता है, तो उसका असर अंततः सामान और सेवाओं की कीमतों के जरिए ग्राहकों पर पड़ सकता है। कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र से सवाल किया कि जब सरकार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दे रही है, तब UPI लेनदेन पर किसी भी संभावित शुल्क का बोझ आखिर आम जनता पर क्यों पड़े।

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