Banda Bus Depot: उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के बांदा बस डिपो में कथित डीजल हेराफेरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि डिपो में हजारों लीटर डीजल के हिसाब-किताब में अनियमितता की गई। इस मामले में तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि शिकायतकर्ता ने मुख्य आरोपी स्टेशन मास्टर को बचाने का आरोप लगाया है। क्या है पूरा मामला जानकारी के अनुसार, चित्रकूट धाम मंडल के बांदा डिपो में कार्यरत कर्मचारी कपिल कुमार कश्यप ने प्रबंध निदेशक को एक शिकायती पत्र भेजा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 8 जुलाई 2026 को बांदा डिपो में 20 हजार लीटर डीजल से भरा टैंकर पहुंचा था, जिसमें 14 हजार लीटर डीजल की कथित हेराफेरी की गई। शिकायत के बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया, लेकिन स्टेशन मास्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। दस्तावेजों में गड़बड़ी मामले की जानकारी लेने जब क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) कार्यालय पहुंचा गया तो पता चला कि कर्मचारियों के आपसी विवाद के दौरान यह मामला सामने आया। प्रारंभिक जांच में डीजल के लेखा-जोखा से जुड़े दस्तावेजों में कई अनियमितताएं मिलने की बात कही गई है। इसी आधार पर तीन कर्मचारियों को निलंबित किया गया और पूरे प्रकरण की जांच सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (वित्त) को सौंपी गई है। फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। स्टेशन मास्टर पर सवाल इस संबंध में क्षेत्रीय प्रबंधक राम लावट ने बताया कि मामले की जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जांच अधिकारी एवं सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (वित्त) ने बताया कि उन्हें 29 मई 2026 को डीजल हेराफेरी की जांच सौंपी गई थी। जांच के दौरान डीजल से संबंधित दस्तावेजों में अनियमितताएं मिली हैं और इस मामले में लिपिकों के साथ-साथ स्टेशन मास्टर की लापरवाही भी सामने आई है। उन्होंने बताया कि उन्हें पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड की भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। रिटायरमेंट बना बाधा हालांकि, जांच अधिकारी ने यह भी कहा कि उनकी मूल तैनाती प्रयागराज में है और उन्हें अस्थायी रूप से बांदा भेजा गया था। साथ ही उनका सेवानिवृत्ति में केवल नौ दिन का समय शेष है। ऐसे में इतने कम समय में वर्षों पुराने रिकॉर्ड की जांच पूरी कर पाना संभव नहीं है। उन्होंने इस संबंध में उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर जांच से असमर्थता जताई है। अंतिम रिपोर्ट का इंतजार जांच अधिकारी के बयान के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। उनके अनुसार, केवल निलंबित तीन कर्मचारियों की ही नहीं, बल्कि स्टेशन मास्टर की भूमिका की भी जांच आवश्यक है। यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाती है, तो डीजल हेराफेरी से जुड़े और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं। फिलहाल विभागीय जांच जारी है और सभी की नजर अब अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। रिपोर्ट- अभिषेक शुक्ला ये भी पढ़ें: बीच सड़क महिलाओं का बवाल! मामूली कहासुनी ने लिया हिंसक रूप