नोएडा

जमीन के बदले करोड़ों का मुआवजा! नोएडा एयरपोर्ट ने बदली किसानों की जिंदगी

5000 हेक्टेयर से अधिक जमीन का हुआ अधिग्रहण, 8,000 करोड़ से ज्यादा का बंटा मुआवजा; पैसे से पैसा बनाने में जुटे अन्नदाता।

Land Acquisition : नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से उड़ानें चालू हो चुकी हैं, जिसने इस क्षेत्र की स्थिति को विश्व मानचित्र पर बदल दिया है। इस विशाल परियोजना के लिए किसानों से अब तक 5000 हेक्टेयर से अधिक भूमि ली जा चुकी है और विकास कार्य निरंतर जारी है। यह एयरपोर्ट आने वाले समय में सबसे बड़े हवाई अड्डों में से एक बनने की दिशा में अग्रसर है। इस बीच, जिन किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया है, उन्हें मुआवजे के रूप में करोड़ों रुपये दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, सितंबर 2025 तक यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) ने पहले दो चरणों में अधिग्रहित 2,400 हेक्टेयर भूमि के लिए लगभग 7,000 किसानों को 8,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है। आइए देखते हैं कि अचानक मिली इस बड़ी दौलत का जेवर के किसान कैसे उपयोग कर रहे हैं।

रातोंरात चमकी किस्मत

जमीन के बदले मिले  मुआवजे ने जेवर के सैकड़ों किसानों को  करोड़पति बना दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इतनी राशि पाकर कई परिवारों के लिए यह एक ख्वाब जैसा  था, जिससे उनकी जीवनशैली पूरी तरह बदल गई। मुआवजे की रकम से किसानों ने भव्य और लक्जरी घर बनवाए, महंगी गाड़ियां जैसे फॉर्च्यूनर और थार खरीदीं और महंगे आईफोन जैसे मोबाइल फोन लिए। हैरानी की बात यह है कि कुछ प्रभावशाली किसानों ने इस पैसे से हेलीकॉप्टर तक खरीद लिए, जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है।

किसान से बने ब्रोकर

असमय आई इस दौलत की सबसे बड़ी झलक जेवर की सड़कों और बाजारों में देखने को मिल  है, जहां जगह-जगह नए रियल एस्टेट ऑफिस खुल चुके है । कल तक खेतों में काम करने वाले कई किसान अब खुद रियल एस्टेट ब्रोकर बन गए हैं और जेवर की पूरी अर्थव्यवस्था को नया मोड़ दे रहे हैं। अहम बातयह है कि यहां के लग आज भी जमीन को सबसे सुरक्षित और बेहतर निवेश विकल्प मानते हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में किसान मुआवजे की रकम को वापस रियल एस्टेट और जमीनों में ही लगा रहे हैं।

 मुआवजे पर विरोध

प्रशासन ने हर कदम में मुआवजे की रकम को बढ़ाया है। पहले चरण में किसानों को ₹2,400 प्रति वर्ग मीटर मिला, दूसरे चरण में इसे ₹3,300 प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया और अब तीसरे चरण के लिए यह ₹4,400 प्रति वर्ग मीटर  है। इसके बावजूद,  किसानों का विरोध पूरी तरह ख़तम  नहीं हुआ है। किसानों का कहना है कि जेवर और आसपास के मार्केट रेट और भूमि की बढ़ती कीमतों के अनुसार उन्हें जो मुआवजा मिला है, वह अब भी कम  है।

कहीं समझदारी कहीं नुकसान

जेवर के अधिकांश किसान मुआवजे की इस मोटी रकम को गहराई से विचार करके दीर्घकालिक संपत्ति में रूपांतरित कर रहे हैं। आधुनिक युग के साथ तालमेल बिठाते हुए यहां के किसान अब शेयर बाजार, ऑनलाइन ट्रेडिंग और म्यूचुअल फंड में भी अच्छी खासी निवेश कर रहे हैं। कई समझदार किसानों ने शुरुआती मुआवजे से जेवर के नजदीकी गांवों में सस्ती ज़मीनें खरीद ली थीं।

उन्हें इसका दुगना लाभ तब मिला जब सरकार ने दूसरे और तीसरे चरण के विस्तार के लिए उन जमीनों को भी ऊंचे दामों पर अधिग्रहित कर लिया, जिससे उनका लाभ कई गुणा बढ़ गया। हालांकि, इस कहानी का एक दूसरा पहलू भी है। कुछ किसान ऐसे रहे जिन्होंने बिना कोई वित्तीय योजना बनाए जल्दबाजी में सब पैसा महंगी गाड़ियों और ऐश-आराम में खर्च कर दिया। उन लोगों का सामाजिक रुतबा तो कुछ समय के लिए बदल गया, लेकिन वे दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता पाने से चूक गए।

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