नोएडा

22.80 करोड़ रुपये का वेटलैंड बदहाल, कोंडली नाला अब भी गंदगी से बेहाल

यमुना का प्रदूषण कम करने के लिए 2022 में बनाए गए थे तीन वेटलैंड; रख-रखाव के अभाव में कचरे से पटे पड़े हैं प्लांट, कई मशीनें हुईं गायब।

Yamuna Pollution : यमुना नदी के प्रदूषण को कम करने और कोंडली नाले के पानी को साफ़ करने के लिए   नोएडा प्राधिकरण ने 2022 में विशाल बजट के साथ एक अहम प्रोजेक्ट शुरू किया था । इसके तहत लगभग 22.80 करोड़ रुपये की लागत से तीन आधुनिक वेटलैंड बनाए गए थे, यानी हर एक ेटलैंड पर लगभग 7.60 करोड़ रुपये खर्च किए गए। लेकिन निर्माण के चार साल बद दावों और वास्तविकता में बड़ा अंतर दिखा । सफाई और प्रदूषण नियंत्रण के तमाम बड़े दावों के बीच ये तीनों वेटलैंड अब गंदगी और  कचरे से भरे पड़े हैं। हालत यह है कि पानी की सफाई के लिए लगई गई कई कीमती मशीनें या तो पूरी तरह से बंद हो चुकी हैं या वहां से गायब हैं। 

तीन सेक्टरों के फ्लोटिंग वेटलैंड

इस योजना के नियंत्रण सेक्टर-50, सेक्टर-82 और सेक्टर-142 मं एड्वेंट के निकट तीन प्रमुख वेटलैंड बनाए, जिनकी लंबाई लगभग 500 मीटर थी। नाले के गंदे पानी को छानने के लिए पत्थरों, विशेष जालियों, फ्लोटिंग वेटलैंड और पानी में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने के लिए आधुनिक ऑक्सीडेशन यूनिट्स बनाई गई थीं । मौजूदा समय में ये जालियां भारी मात्रा में फंसे प्लास्टिक और मलबे के कारण बाधित हो गई हैं। सफाईकर्मी इस कचरे को निकालकर सिर्फ किनारे पर इकट्ठा कर देते हैं, लेकिन इसके बाद कोई प्रभावी उठान या स्थायी निस्तारण नहीं किया जाता, जिससे गंदगी फिर से नाले में चली जाती है।

भुगतान के बाद भूला प्रोजेक्ट

इस पूरी लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण सेक्टर-82 के वेटलैंड में देखा जा सकता है। आरोप है कि निर्माण कार्य ख़तम  होने और निजी एजेंसी को राशि देने के बाद जल विभाग ने इस परियोजना की देखभाल करना पूरी तरह बंद कर दिया। न तो इसकी निरंतर निगरानी की गई और न ही कभी यह जांचने का प्रयास किया गया कि पानी की गुणवत्ता में कितना सुधार हुआ है। नतीजतन, करोड़ों रुपये की यह योजना अब नाले पर एक अतिरिक्त बोझ बन गई है। यहाँ रखी गई महंगी मशीनें चोरी हो चुकी हैं और जो बची हैं, उन्हें नाले के वेग में बहने से रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर रस्सियों से बांधकर रखा गया है।

यमुना सफाई की खुली पोल

यह कोंडली नाले का पानी अनेक बड़े क्षेत्रों से होकर गुजرتा है और अंत में सीधे यमुना नदी में मिल जाता है। ऐसी स्थिति में वेटलैंड की यह दयनीय हालत न केवल लाखों रुपये की बर्बादी पर गंभीर सवाल उठाती है, बल्कि यमुना नदी को स्वच्छ रखने की प्रशासनिक कोशिशों का भी पर्दाफाश करती है। इस गंभीर मामले पर ध्यान केंद्रित करते हुए नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी क्रांति शेखर सिंह ने कहा है कि तीनों वेटलैंड के निर्माण और वर्तमान उपयोग से संबंधित समस्त जानकारी मांगी जा रही है। इसके बाद यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी वेटलैंड का उचित रख-रखाव हो और वे सही ढंग से कार्य कर सकें।

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