UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा बड़ा मोड़ आया है ह, जो सिर्फ़ हवा का दिशा नहीं बदलेगा, बल्कि विकास की पूरी कहानी को ही बदल देगा । सोमवार से घरेलू उड़ानों की शुरुआत के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट सिर्फ़ एक हवाई अड्डा नहीं रह गया । यह मोदी-योगी की 'डबल इंजन' सरकार का वो सबसे बड़ा प्रतीक बनने जा रहा है, जिसे 'विकसित भारत' और 'विकसित उत्तर प्रदेश' की सबसे आलोकित मिसाल माना जा रहा है। हर चुनावी मंच से गूंजा था जो नाम, अब वो धरातल पर है तैयार यह कोई रातों-रात हुआ करिश्मा नहीं है।बल्कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव से लेकर 2017 के विधानसभा, 2019 और 2024 के आम चुनाव तक हर चुनावी रैली के मंच से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस परियोजना का नाम लेकर विकास का भरोसा दिलाया था, वो अब सच हो चुकी है।नींव रखना से लेकर निर्माण तक, भाजपा ने इसे हमेशा अपनी रफ्तार के सबसे बड़े उदाहरण के रूप में पेश किया है। क्या विपक्ष के चक्रव्यूह को भेद पाएगा यह ‘ग्लोबल मॉडल’? विरोधी पक्ष लगातार किसानों के मुआवजे, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की योजना बना रहा है, लेकिन सरकार के पास इस जाल को तोड़ने का एक अचूक हथियार आ गया है। 2017 से पहले जिस उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू राज्य’ का टैग दिया जाता था, आज उसे एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर और अब भव्य एयरपोर्ट के दम पर ‘ब्रांड यूपी’ में बदल दिया गया है। भाजपा का आईटी सेल अभी से ही इस एयरपोर्ट के ड्रोन शॉट्स, आलीशान सुविधाओं और ग्लोबल कनेक्टिविटी के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर विपक्ष के दावों की हकीकत सामने लाने में लगा है। युवाओं के लिए बनेगा रोजगार का रनवे राजनीतिक विशेषज्ञो की मानें तो यह एयरपोर्ट केवल यात्रियों को नहीं उड़ाएगा, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रचार को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। इसके पहले फेज से ही सालाना करीब 1.2 करोड़ यात्री सफर करेंगे, जो चारों फेज पूरे होने पर 7 करोड़ तक पहुंच जाएगा। इसके आसपास बनने जा रहे लॉजिस्टिक हब, फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क और टॉय पार्क से लाखों नौकरियां पैदा होने का दावा है। भाजपा इसे ‘रोजगार का रनवे’ बताकर युवाओं को साधने की पूरी तैयारी कर चुकी है। ये भी पढ़े : Crime news: दोस्त की हत्या कर चेहरा और पहचान मिटाने के लिए शव को जिंदा जलाया