EV Bus : शहरों को जाम और प्रदूषण से छुटकारा दिलाने के बड़े दावों के साथ शुरू हुई 'ई-सिटी बस सेवा' पहले ही हफ्ते में असफल होती दिखती है। अब आम लोगों और बस चालकों को परिवहन विभाग और स्थानीय प्राधिकरणों की जल्दबाजी और गलत योजना का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। बिना बुनियादी ढांचे और रूट प्रचार के बिना, ये बसें कुप्रबंधन के रूट पर फंस गई हैं। 2 राउंड में बैटरी खत्म, 85 स्टॉप पर शेल्टर नहीं ग्रेटर नोएडा वेस्ट और अन्य लंबे मार्गों पर बसों की बैटरी सिर्फ दो बार बंद हो जाती है, जिससे चालकों को मोरना डिपो लौटना पड़ता है। हालाँकि, सेक्टर-90 डिपो में निर्धारित 20 चार्जिंग स्टेशनों में से 10 अभी तक पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाए हैं, जिससे बसों को चार्ज करने में चार से चार घंटे लगते हैं। साथ ही, जिले में 105 स्टॉपेज हैं, जिनमें से 85 में यात्रियों को धूप से बचाने के लिए बस शेल्टर भी नहीं हैं। बसें खाली चल रहीं, छोटे रूट पर किराया ज्यादा जल्दबाजी का दूसरा बड़ा नुकसान यह था कि परिवहन विभाग लोगों को इस सेवा के बारे में जानकारी ही नहीं दे पाया था। मोरना से चार मूर्ति तक किराया सिर्फ 30 रुपये है, लेकिन जानकारी न होने से लोग ऑटो में ठंसकर सफर कर रहे हैं और बसें खाली हैं। साथ ही, छोटे मार्गों पर ई-बस का किराया ऑटो से 20 रुपये अधिक है। सवारी बैठाने को लेकर अब सड़कों पर बहस भी होने लगी है। गलगोटिया कॉलेज के पास, ऑटो चालकों ने ई-बस चालक से अभद्रता करने के अलावा सवारियों को नहीं भरने की धमकी दी। एयरपोर्ट पर मनमानी वसूली, कासना में नया स्टेशन नोएडा एयरपोर्ट पर भी ओला, उबर और रैपिडो के कियोस्क हैं, लेकिन नियमित गाड़ी नहीं मिलने से यात्री घंटों परेशान रहते हैं। लखनऊ से आए एक यात्री, गर्वित शर्मा, ने बताया कि कैब चालक नोएडा या दिल्ली के लिए 1,000 रुपये से अधिक की मनमानी वसूली कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें तुरंत कन्वेंस नहीं मिलता। इस अव्यवस्था के बीच, 24 जून तक कंपनियों से बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर (BOT) के आधार पर कासना बस डिपो में नया चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं। नॉलेज पार्क-2, जिम्स अस्पताल और जगत फार्म सहित 16 स्थानों पर पहले चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे, सीनियर मैनेजर रीना यादव ने बताया। अथॉरिटी अधिकारियों का दावा है कि पूरी व्यवस्था एक हफ्ते में पटरी पर आ जाएगी। ये भी पढ़े : रिश्वत के आरोप में हटाई गई महिला कर्मी को फिर मिली नौकरी, सवाल उठे तो जिला अस्पताल ने लिया यू-टर्न